नवादा : वैशाख की भीषण गरमी व शरीर झुलसा देने वाली तपिश से इनसान ही नहीं पशु भ त्रस्त हैं. पशुपालकों को अपने पशुओं को बचाने के लिए प्रतिदिन सतर्कता बरतने की जरूरत है.
पशु अस्पताल में दवाएं नहीं होने से पशुपालकों की परेशानी और बढ़ गयी है. इस भीषण गरमी में पशुओं को डायरिया, चिमोकरन व बुखार आदि होने का डर बना रहता है. इससे बचाव के लिए सावधानी बरतने की जरूरत है. ऐसे समय में तो हर सप्ताह पशुओं के स्वास्थ्य जांच की आवश्यकता होती है.
