रावण व मेघनाद का वध कार्यक्रम कराती है इंदिरा चौक की श्री चक्रवर्ती सम्राट पूजा समिति
नवादा : ओड़िशा में तालकोटा में झारापाड़ा की देवीमंदिर व स्थापित प्रतिमा के प्रतिरूप की झलक इस बार दशहरे के अवसर पर जिलेवासियों को देखने का लाभ मिलेगा. अपनी कलात्मकता के लिए मशहूर यह मंदिर लंबे समय से लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा है. इसी भक्तिभाव व श्रद्धा के सम्मिश्रण को नगर के श्री चक्रवर्ती सम्राट पूजा समिति, इंदिरा चौक ने अपने पंडाल प्रतिरूप में देने का निश्चय किया है. इसके लिए बंगाल के आसनसोल व कोडरमा से कारीगर मंगवाये गये हैं. समिति ने दशहरे के आयोजन को कलात्मकता की भव्यता के साथ आस्था का जनसैलाब बनाने को लेकर तैयारियां शुरू कर दी हैं.
लगेगा सोने का मुकुट : प्रतिमा को बेहद की आकर्षक और माता की ममतामयी लुक देने को लेकर समिति के लोगों ने मुंगेर से कलाकारों को बुलाया है. प्रतिमा को एक ऊंचे पहाड़ के बैकग्राउंड के साथ स्थापित किया जायेगा. पहाड़ पर भगवान महादेव विराजमान होंगे. इनकी जटा से गंगा की अविरलधारा बहती रहेंगी. इसी के साथ सोने की मुकुट पहनी माता भगवती भक्तों पर श्रद्धा बरसाती नजर आयेंगी. दो बड़े आकार के भैंसासुर और दो भव्य शेर की प्रतिमा भी माता के आसपास दिखेगा. पंडाल में स्थापित प्रतिमाओं में ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी होंगे. माता लक्ष्मी और माता सरस्वती की प्रतिमा भी पंडाल में दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित करती हैं. सोने की मुकुट जड़ी प्रतिमा शहर में यह पहली होती है.
रावण वध का भी होता है आयोजन
दशहरा मेले का सबसे बड़ा आयोजन जिले में रावण वध कार्यक्रम के रूप में होता है. यह आयोजन नगर के हरिश्चंद्र स्टेडियम में कराया जाता है. स्टेडियम के बड़े मैदान पर जिले के आलाधिकारी, समाज से जुड़े लोग, विभिन्न पूजा समितियों के लोग और बड़ी संख्या में जिलेभर से आये दर्शक शामिल रहते हैं. तकनीकी रूप से बने रावण व मेघनाद की प्रतिमा को इस बार और भी भव्य बनाया जा रहा है. साथ ही इस बात का ख्याल किया जा रहा है कि इन पुतलों का दहन दर्शकों को इस बार ज्यादा आनंदित कर सके.
विशेष प्रसाद का होता है वितरण
श्री चक्रवर्ती सम्राट पूजा समिति,इंदिरा चौक द्वारा कलश स्थापना से लेकर आठवीं की तिथि तक विशेष प्रसाद का वितरण कराया जाता है. हर शाम हजारों श्रद्धालु माता के प्रसाद का ग्रहण कर खुद को धन्य पाते हैं.
सुरक्षा पर रहेगी खास नजर: पूजा आयोजन के दौरान समिति के लोग की खास नजर चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था पर होती है. किसी को कोई परेशानी न हो इसका विशेष ध्यान रखा जाता है. इसके लिए 10 वॉलेंटियर समिति के बैच के साथ लगे रहते हैं. यह वाूलेंटियर दो शिफ्टों में अपनी सेवा देते हैं.
