नवादा : आरक्षण ने तेजी से लोगों के जीवन में बदलाव लाया है. आरक्षित वर्ग सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसका लाभ ले रहे हैं. कभी समाज के नीचले पायदान पर रह रहे वर्ग आज मुख्यधारा से जुड़े हैं, तो इसका सीधा मतलब है यह वैशाखी इनके लिए कारगर हुआ है. लाजिमी है सरकार के स्तर पर समतामूलक समाज की स्थापना के लिए आरक्षण का लाभ देकर हर वर्ग को एक-दूसरे के समतुल्य खड़ा किया जाये. पर बिडंबना यह है कि कल तक समाज को आइना दिखा रहा सवर्ण परिवारों के निर्धन व लाचार युवा आज तेजी से पिछड़ते चले जा रहे हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि सरकार के स्तर पर आरक्षण जाति नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर दिया जाना चाहिए. पिछले दो सालों से आरक्षण की समीक्षा के मुद्दे भी उठते रहे हैं.
कई प्रदेशों में इसे लेकर बड़े आंदोलन हुए. गुजरात से निकली यह हवा हरियाणा के लोगों को भी आंदोलित किया. दोनों की राज्यों की सरकारों ने इसमें अहम फैसले लिये. वहां के सवर्ण गरीबों को इसका लाभ दिये जाने की घोषणा हुई. इसके साथ ही यह चर्चा भी आम हो गयी कि आखिर हम पीछे क्यों? इस मुद्दे पर इस वर्ग से जुड़े कुछ लोगों की राय ली, तो साफ-साफ दिखा इनका आर्थिक पिछड़ापन इनके वर्तमान दौर में बड़ी बाधा बनी हुई है.
