नवादा (सदर) : जिले के वारिसलीगंज थाना क्षेत्र के गौरक्षणी मुहल्लों में रहकर ठेला चलानेवाले उपेंद्र साव अपनी दो नाबालिग बच्चियों की तलाश के लिए नवादा व गया में अफसरों के बाद पटना में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगा चुके हैं.
छह माह पहले 20 अगस्त को वारिसलीगंज से दो बेटियां 15 वर्षीय रागिनी व 13 वर्षीय राजमणि का अपहरण करने की शिकायत शेखपुरा निवासी सूबेलाल यादव के पुत्र पिंटू कुमार, कृष्णा प्रसाद के पुत्र पवन कुमार, रणवीर कुमार व रामइत्तर यादव के पुत्र कौशल कुमार पर बेटियों का वारिसलीगंज थाने में दर्ज करायी थी.
छह महीने बीतने के दौरान दंपती अपने दोनों पुत्रियों की तलाश में छह बार पुलिस अधीक्षक के जनता दरबार में, सैकड़ों बार वारिसलीगंज थाने में, तीन बार डीआइजी के जनता दरबार में तथा एक बार मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगा चुके हैं. प्रशासन व मीडिया में गुहार लगा-लगा कर थक चुके साहू दंपती अब बिल्कुल टूट चुके हैं.
यह न्याय के लिए कहीं भी जाने को तैयार है. हरेक जगह गुहार लगा कर थक चुके दंपती का कहना है कि अभी भी आरोपित युवक मुकदमे को हटाने तथा बुरा अंजाम भुगतने की लगातार धमकी दे रहे हैं. उपेंद्र साव ने कहा कि 31 अगस्त को मेरे मोबाइल के कॉल डिटेल के आधार पर गया जिले के बीथोशरीफ निवासी सुकुर राय के पुत्र शंकर कुमार को न्यायिक हिरासत में लिया था, लेकिन उसे थाने से छोड़ दिया. इसी तरह 14 दिसंबर को पुलिस ने कौशल कुमार, पवन कुमार व पिंटू कुमार को गिरफ्तार किया गया था.
पर, मुख्य आरोपित पिंटू कुमार को नाबालिग बताकर थाने से ही छोड़ दिया गया था. दर-दर फरियाद लगाने वाले उपेंद्र साव की पत्नी सीता देवी ने बताया कि 16 दिसंबर की शाम में नवादा कोर्ट से लौट रही थी. इसी दौरान रेलवे क्रोसिंग के पास सुबेलाल यादव व अन्य व्यक्तियों ने रास्ता रोक कर मुकदमा उठाने की धमकी दी.
क्या हुई अब तक कार्रवाई : छह महीने में प्रशासन ने चार आरोपित युवकों को गिरफ्तार किया. इसमें दो को नाबालिग बताते हुए थाने से ही छोड़ दिया.
मुख्यमंत्री के जनता दरबार का असर दिखाकर इस मामले में मगध रेंज के डीआइजी ने वारिसलीगंज थानाध्यक्ष संजय कुमार को निलंबित कर दिया. छह महीने बीतने के बाद भी पुलिस ने 15 वर्षीय रागिनी व 13 वर्षीय राजमणि को ढ़ूंढ पाने में विफल रही है. परिजनों को आशंका है कि दोनों युवतियों का अपहरण कर अपराधियों ने कहीं चकला बाजार में न बेच दिया हो.
कार्रवाई से पीड़ित परिवार खुश नहीं है. पुलिस पर मामले में लापरवाही बरतने का आरोप लगा रहे हैं. इस मामले को लेकर वैश्य समुदाय के लोग भी उपेंद्र साहू व सीता देवी का साथ देने के लिए अब तक आगे नहीं आये हैं. जिस राज्य में छह महीने पूर्व अपहरण हुए दो नाबालिग छात्राओं का सुराग नहीं मिला हो वहां कानून व्यवस्था की ठीक कैसे कही जा सकती है.
