मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने व विसर्जन के लिए लाइसेंस लेना अनिवार्य
नवादा (नगर) : विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना पूरे जिला में हजारों स्थानों पर की जाती है. अकेले जिला मुख्यालय में लगभग पांच सौ प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है. सरस्वती पूजा करनेवाले अधिकतर पूजा पंडालों में छोटे बच्चों द्वारा यह तैयारी की जाती है. वहीं सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रतिमा स्थापित कर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है.
लेकिन, पुलिस-प्रशासन द्वारा सभी पूजा करनेवाले कमेटियों को प्रतिमा स्थापित करने व विसर्जन के लिए लाइसेंस लेने की बाध्यता बनाये जाने से लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है.
नगर में लगभग पांच सौ प्रतिमाएं विभिन्न मुहल्लों व गलियों में स्थापित की जाती है. इन सभी प्रतिमाओं के लिए लाइसेंस लेने का प्रशासन द्वारा फरमान जारी किया गया है. लेकिन, पुलिस-प्रशासन स्तर पर इसके लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं दिखायी दे रही है.
बड़े उत्सबों में पूजा का आयोजन बड़े लोगों के द्वारा किया जाता है. लेकिन सरस्वती पूजा का आयोजन अधिकतर स्कूली बच्चों द्वारा किया जाता है. ऐसे स्थिति में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को पुलिस-प्रशासन किस प्रकार से पूजा का लाइसेंस निर्गत करेगी. वहीं इसके लिए कहां आवेदन करना है, आवेदन करने के बाद कब लाइसेंस मिलेगा, इन सब बातों की जानकारी भी पूजा करनेवाले छोटे बच्चों को नहीं है. शिक्षण संस्थान चलानेवाले भी पुलिस प्रशासन के इस फरमान के बाद लाइसेंस लेने के लिए परेशान दिख रहे हैं. प्रशासन द्वारा इतनी बड़ी संख्या में लाइसेंस देने के लिए कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गयी है.
प्रतिमा स्थापित करने व विसर्जन के लिए स्थानीय थाने में आवेदन करना होगा. बाजा बजाने के लिए सदर एसडीओ कार्यालय में आवेदन करना होगा. ध्यान रहे कि पूजा करनेवाले 18 साल से कम उम्र के कई बच्चे होंगे. उन्हें थाने व एसडीओ कार्यालय जाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा. वहीं पूजा की व्यवस्था करने के बजाय वैसे पूजा आयोजक लाइसेंस लेने में ही परेशान दिखेंगे.
शांतिपूर्ण पूजा संपन्न कराने का है सोच : सरस्वती पूजा को शांतिपूर्ण व धामिक माहौल में संपन्न कराने को लेकर पुलिस-प्रशासन द्वारा लाइसेंस लेने की बाध्यता तय की गयी है. एसपी विकास बर्मन की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में इसका निर्णय लिया गया है. जिले में जितनी भी प्रतिमा स्थापित होगी, उन प्रतिमाओं के लिए लाइसेंस लेने की व्यवस्था की गयी है.
लाइसेंस की व्यवस्था से निश्चित ही लाभ होगा. लेकिन जो भी श्रद्धालु मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर वर्षों से पूजा अर्चना करते आ रहे है उन्हें आसानी पूर्वक प्रतिमा स्थापित कर पूजा करने की व्यवस्था के लिए लाइसेंस निर्गत करने हेतु आसान व्यवस्था बनायी जाये, ताकि हर कोई अपने धार्मिक आस्था का सही से प्रदर्शन कर सके.
