नवादा (सदर) : जिले के ग्रामीण इलाकों में छोटे-छोटे विवादों को निबटाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रदेश भर के सभी थानों में प्रत्येक मंगलवार को जनता दरबार आयोजित करने का निर्देश दिया गया था.
शुरुआत के दिनों में आयोजित जनता दरबार में स्थानीय स्तर पर कई छोटे-बड़े मामलों का निष्पादन भी किया जाता था. नियमानुसार थाने की दीवार पर प्रत्येक मंगलवार को जनता दरबार आयोजित होने संबंधी सूचना भी मोटे-मोटे अक्षरों में अंकित की गयी थी. संबंधित थानाध्यक्ष भी ससमय मामलों के निष्पादन के लिए जनता दरबार लगाते थे. परंतु, विगत छह महीनों से पहले जनता दरबार का आयोजन जिले के किसी भी थानों में नहीं हो पा रहा है. घरेलू विवाद यथा भाई-भाई के बीच मारपीट, पति-पत्नी के बीच झगड़े, नाली निकालने के झगड़े, खेल-खेल में बच्चों के झगड़े जैसे कई मामलों का निष्पादन थाना स्तर पर ही जनता दरबार लगा कर ही दोनों पक्षों के बीच सुलझाया जाता था.
थानों में बगैर एफआइआर दायर किये ही ऐसे मामलों का निष्पादन किया जाता था, जिसके कारण कोर्ट पर मुकदमों का दबाव नहीं होता था और न ही संबंधित लोगों को कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ता था. वर्तमान समय में जिला मुख्यालय के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में स्थित थानों में जनता दरबार का आयोजन नहीं होने से प्रत्येक छोटे-बड़े मामलों को लेकर वादी-प्रतिवादी की ओर से थाने में एफआइआर दर्ज कराया जाता है, जिससे थानों में भी मुकदमों की संख्या में वृद्धि होने के कारण दूसरे कई कार्यों के निष्पादन में भी पुलिस अधिकारी को परेशानी हो रही है. आंकड़ों के तौर पर माना जाता है कि मुकदमों की संख्या बढ़ने पर अनुसंधानकर्ता पर जांच व निष्पादन का दबाव वरीय अधिकारियों पर पड़ता है. इसके कारण मुकदमों की सुनवाई समुचित ढंग से नहीं हो पाती है. विगत एक माह से प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा ग्रामीण इलाकों के भूमि विवादों को जल्द से जल्द निष्पादन करने के लिए प्रत्येक शनिवार को सीओ व थानेदार के संयुक्त निर्देशन में थाने में ही दरबार लगा कर भूमि विवाद संबंधी मामलों का निबटारा किया जाता है.
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों ने बताया कि जनता दरबार में अपनी बातों को सही ढंग से रखने का उचित मौका मिलता है. ऐसे मुकदमे करने की स्थिति में थानेदार भी पीड़ित परिवार का कोई भी व्यथा ठीक ढंग से नहीं सुन पाते है. जनता दरबार के नहीं लगने से लोगों को सुलह-समझौता के बजाय सीधे एफआइआर की प्रक्रिया से गुजनी पड़ती है जो गरीब लोगों के लिए काफी दुखद साबित होता है. फिर से जनता दरबार का आयोजन होने से लोगों को छोटी-बड़ी समस्याएं थाना स्तर पर ही सुलझाने का मौका मिल पायेगा.
