लापरवाही से सड़ रहे चीनी मिल के संयंत्र

वारिसलीगंज : सरकारी बदइंतजामी के कारण वारिसलीगंज चीनी मिल की कीमती मशीनों में जंग लग चुकी है. छत से पानी का रिसाव हो रहा है. कर्मचारियों की लापरवाही के कारण चीनी मिल सहित कई सरकारी विभागों में बिजली देने वाला ब्याॅलर अस्तित्व विहीन हो चुका है. अभी इसकी कीमत एक करोड़ रुपये आंकी जा रही […]

वारिसलीगंज : सरकारी बदइंतजामी के कारण वारिसलीगंज चीनी मिल की कीमती मशीनों में जंग लग चुकी है. छत से पानी का रिसाव हो रहा है. कर्मचारियों की लापरवाही के कारण चीनी मिल सहित कई सरकारी विभागों में बिजली देने वाला ब्याॅलर अस्तित्व विहीन हो चुका है. अभी इसकी कीमत एक करोड़ रुपये आंकी जा रही है.
जानकारी के अनुसार, काफी आधुनिक तरीके से बनाया गया यह व्यॉलर 10 किलोमीटर दूरी तक के लिए बिजली आपूर्ति करने में सक्षम था. जानकारों का कहना है कि चीनी मिल का सबसे महत्वपूर्ण संयंत्र से पूरे प्रखंड क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की जाती थी. गन्ने से भरे रेल डिब्बे को खिंचनेवाले पांच शक्तिशाली ट्रैक्टर खुले में रहने के कारण खराब हो चुके हैं.
बरसाती पानी का प्रवेश चीनी मिल परिसर में होने के कारण इसके सूक्ष्म यंत्र भी बर्बाद हो रहे हैं. चीनी मिल की चाहरदीवारी टूटने व पहरेदारों की कमी के कारण कुछ आवष्यक संयंत्र भी चोरी हो गया है.
लंबे समय तक चीनी मिल बंद रहने के कारण स्थानीय कामगारों की कुदृष्टि भी इसके विशाल अस्तित्व को नुकसान पहुंचा रहा है. कई कीमती संयंत्र मसलन शक्तिशाली मोटर, विदेशी बल्व व कल-पुरजों की चोरी कर्मचारियों की संलिप्ता के कारण हो गयी है. सेवानिवृत कर्मचारियों का कहना है कि 82 एकड़ में फैले वारिसलीगंज चीनी मिल की देखरेख की कमी के कारण ऐसी स्थिति हो गयी है.
यहां पहरेदारी के लिए दर्जनों कर्मचारियों की जरूरत है. फिलहाल दो-तीन कर्मचारियों से काम चलाया जा रहा है.
वर्ष 1993 से बंद पड़े इस चीनी मिल के बाद जितने भी उच्चाधिकारी आये, सबने इस विशाल धरोहर को लूटने का काम किया. इस संबंध में किसी भी अधिकारी का पक्ष इनकी अनुपस्थिति के कारण नहीं ली जा सकी है.

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