स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए बन रही डीपीआर

नवादा (सदर) : हरिश्चंद्र स्टेडियम का कायाकल्प होने का समय अब आ गया है. खिलाड़ियों को अब अपने ही मैदान में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूर्वाभ्यास करने की सुविधा मिलेगी. स्टेडियम से जल निकासी की व्यवस्था के साथ-साथ दर्शकों को बैठने के लिए गैलरी, सुरक्षा के लिए दीवार, गेट व सभी कॉर्नर पर शौचालय […]

नवादा (सदर) : हरिश्चंद्र स्टेडियम का कायाकल्प होने का समय अब आ गया है. खिलाड़ियों को अब अपने ही मैदान में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए पूर्वाभ्यास करने की सुविधा मिलेगी. स्टेडियम से जल निकासी की व्यवस्था के साथ-साथ दर्शकों को बैठने के लिए गैलरी, सुरक्षा के लिए दीवार, गेट व सभी कॉर्नर पर शौचालय बनाने की तैयारी की जा रही है.
डीएम मनोज कुमार ने हरिश्चंद्र स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए डूडा के कार्यपालक अभियंता को तीन दिन में डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार करने का निर्देश दिया है.
डीपीआर तैयार होने के बाद इसे प्रशासन की ओर से प्रदेश सरकार को भेजा जायेगा. स्वीकृति मिलने के बाद राज्य योजना मद से इसका जीर्णोद्धार होगा. इस बार स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने भी अपने खजाने खोल दिये है. जीर्णोद्धार पर तीन से चार करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जतायी जा रही है. प्रशासन की इस पहल के बाद जिले के खिलाड़ियों में काफी उत्साह देखा जा रहा है. क्रिकेट का टूर्नामेंट हो या फिर कोई जिलास्तरीय समारोह सभी कार्यों के लिए हरिश्चंद्र स्टेडियम का इस्तेमाल होगा.
फिलहाल स्थिति बदहाल
हरिश्चंद्र स्टेडियम का कायाकल्प होने के बाद दूर्दशा से निजात मिल पायेगा. स्टेडियम के पूर्वी छोर पर स्थित मत्स्य विभाग के तालाब के कारण दीवारे हमेशा क्षतिग्रस्त हो जाता है. तालाब का पानी हरिश्चंद्र स्टेडियम में घुस जाता है. स्टेडियम का आधा से अधिक क्षेत्र रख-रखाव के कारण बेकार हो जाता है.
सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहने व दीवार टूट जाने के कारण यह स्टेडियम मवेशियों का तबेला बन जाता है. जीर्णोद्धार के दौरान स्टेडियम में जल निकासी व मिट्टी भरायी होने के बाद दीवारों का निर्माण व दोनों मुख्य द्वारों पर लोहे का गेट लगाये जाने की योजना है. इससे स्टेडियम सुरक्षित हो सके. अनधिकृत तरीके से लोगों का आवागमन, मवेशियों का विचरण व जुआरियों का अड्डा भी बंद हो जायेगा. दूर्दशा से स्टेडियम को निजात मिल पायेगा.
खिलाड़ियों को होगी सहूलियत
स्टेडियम के सौंदयीकरण के बाद क्रिकेट वॉलीबॉल,फुटबॉल, खो-खो, कबड्डी आदि खेलों के खिलाड़ियों को पूर्वाभ्यास करने में काफी सहूलियत होगी. स्टेडियम में मवेशियों का विचरण व जल जमाव रहने के कारण क्रिकेट खिलाड़ी पूर्वाभ्यास भी अच्छे तरीके से नहीं कर पाते है. सुरक्षा के कारण स्टेडियम में खिलाड़ियों का पूर्वाभ्यास करना भी कठिन हो जाता है. जुआरियों द्वारा खिलाड़ियों के साथ कई बार मारपीट जैसी घटनाओं का भी अंजाम दिया जाता है.
आठ वर्ष पहले हुई थी स्टेडियम की भराई
स्टेडियम के जीर्णोद्धार को लेकर आठ वर्ष पहले ही विधान पार्षद मद से मिट्टी की भरायी करायी गयी थी.परंतु, पांच फुट के बजाय कम मिट्टी भराये जाने के कारण स्टेडियम में जल जमाव की समस्या से निजात नहीं मिल पाया. खिलाड़ियों को स्टेडियम में बेहतर सुविधा नहीं मिलने का मलाल हमेशा रहता है. जबकि, इसी स्टेडियम से पूर्वाभ्यास कर क्रिकेट, वॉलीबॉल व खो-खो के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं.

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