Nawada News : नवादा-देवघर मार्ग पर संकट : 60 साल पुराना पुल पूरी तरह जर्जर, भारी वाहनों की एंट्री पर रोक

यह पुल वर्ष 1965 में बनाया गया था . भारी वाहनों को फिलहाल वारिसलीगंज-शेखपुरा मार्ग की तरफ डायवर्ट किया गया है. विभाग जल्द से जल्द यहां एक वैकल्पिक डायवर्सन (रास्ता) तैयार करने में जुटा है.

Nawada News :  (बब्लू कुमार ) अगर आप नवादा से जमुई, देवघर, सुल्तानगंज या बासुकीनाथ जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। नवादा-जमुई स्टेट हाईवे पर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है. यहां जमुईया गांव के समीप कोड़िहारी नदी पर बना करीब 60 वर्ष पुराना पुल पूरी तरह जर्जर होकर खतरे की घंटी बन चुका है. पुल की गंभीर स्थिति को देखते हुए पथ निर्माण विभाग ने इस पर से भारी वाहनों के आवागमन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. सुरक्षा के मद्देनजर विभाग ने पुल के दोनों छोरों पर लोहे के मजबूत बैरियर लगा दिए.

धार्मिक यात्रा और व्यापार पर पड़ेगा सीधा असर

यह मार्ग केवल दो जिलों को ही नहीं जोड़ता, बल्कि बिहार और झारखंड के कई महत्वपूर्ण धार्मिक और व्यावसायिक क्षेत्रों की लाइफलाइन माना जाता है. खासकर देवघर जाने वाले कांवरियों, श्रद्धालुओं और मालवाहक वाहनों के लिए यह सबसे प्रमुख और सुगम रास्ता है. पुल पर भारी वाहनों का परिचालन बंद होने से अब गाड़ियों को करीब 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होगी.

बाजार व्यवस्था चरमराने की आशंका, बढ़ सकती हैं कीमतें

स्थानीय व्यापारियों ने इस प्रशासनिक कदम के बाद अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। व्यवसायियों का कहना है कि इस मार्ग से रोजाना सैकड़ों मालवाहक गाड़ियां गुजरती हैं. भारी वाहनों की आवाजाही अचानक रुकने से फल, सब्जी, किराना और निर्माण सामग्री (बालू, सीमेंट, छड़) की सप्लाई चेन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी. यदि समय रहते डायवर्सन नहीं बना, तो स्थानीय बाजारों में रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.

ग्रामीणों और यात्रियों ने की नए पुल की मांग

पुल के जर्जर होने और मुख्य रास्ता ब्लॉक होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों, चालकों और यात्रियों में भारी असंतोष है. लोगों का कहना है कि विभाग को पुल के जर्जर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते ही नए पुल का निर्माण शुरू करा देना चाहिए था. अब ग्रामीणों और राहगीरों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से मांग की है कि युद्धस्तर पर काम चलाऊ डायवर्सन बनाया जाए और जल्द से जल्द यहां एक नए आधुनिक पुल के निर्माण को मंजूरी दी जाए, ताकि लोगों को इस 40 किलोमीटर के अतिरिक्त चक्कर से मुक्ति मिल सके.

भारी वाहनों को वारिसलीगंज-शेखपुरा मार्ग की तरफ डायवर्ट किया

कनीय अभियंता प्रमोद कुमार ने बताया कि यह पुल वर्ष 1965 में बनाया गया था और तकनीकी रूप से अपनी निर्धारित उम्र पूरी कर चुका है. सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए भारी वाहनों को फिलहाल वारिसलीगंज-शेखपुरा मार्ग की तरफ डायवर्ट किया गया है. विभाग जल्द से जल्द यहां एक वैकल्पिक डायवर्सन (रास्ता) तैयार करने की कवायद में जुटा है.

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Published by: Rajeev Kumar

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