नवादा से लौटकर सुमित कुमार
हुप्रतीक्षित नवादा लोकसभा क्षेत्र का जनादेश जनता ने तय कर दिया है. गुरुवार को मतदान केंद्रों पर सुबह छह बजे से ही जुट रही भीड़ ने जता दिया कि लोकतंत्र के इस महापर्व में उनकी दमदार उपस्थिति होगी.
मगर चिलचिलाती गरमी और छठ महापर्व की तैयारियों ने इस बीच उनका खूब इम्तिहान लिया. नतीजा वोटिंग प्रतिशत पिछले चुनाव के मुकाबले अधिक रहा. चुनाव में मतदाताओं ने विकास के नाम पर वोट डाले, लेकिन उसका पैमाना जातीय ही रहा. संगठित वोटों के गोलबंदी के बीच अतिपिछड़ा वोटों में दिखते बिखराव ने बता दिया कि परिणाम में वे निर्णायक बनेंगे. बरबीघा से लेकर रजौली और हिसुआ से लेकर गोविंदपुर तक उम्मीदवार व दलों के नेता अपने-अपने वोटरों को साधते दिखे. मतदान केंद्रों पर सुबह छह बजे से ही मतदाताओं की चहलकदमी शुरू हो गयी थी. कई वोटर मॉर्निंग वॉक करते हुए ही गांधी इंटर कॉलेज केंद्र पर पहुंचे. सुबह मिलने वालोें का बस एक ही सवाल था – ‘की हो वोटवा देल्हो… चल्हो हमहू आवा हियो…’.
नवादा में 75-25 का मुकाबला
नवादा विधानसभा
क्षेत्र इलाके में बड़ा ही दिलचस्प समीकरण सामने आया. यहां पर एक खास समुदाय के वोट पार्टी की बजाय दो उम्मीदवारों पर फोकस रहे. इस समुदाय ने लोकसभा के लिए राजद (विभा देवी) को जबकि विधानसभा के लिए धुर विरोधी जदयू (कौशल यादव) को दिया. स्थानीय प्रभावी नेताओं के मुताबिक इस समुदाय के 75 फीसदी वोद दोनों उम्मीदवारों को मिले.
रेप का आरोप नहीं बना मुद्दा
राजद के पूर्व विधायक राजवल्लभ यादव पर लगे रेप के आरोप को जिस तरह मुद्दा बनाया गया. क्षेत्र में उसकी कहीं चर्चा नहीं रही. वारसलीगंज चौक पर मिले एक राजनीतिक कार्यकर्ता का मानना था कि अगर यह कोई मुद्दा होता, तो राजवल्लभ के नाम पर वोट ही न पड़ते. क्षेत्र में जातीय समीकरण के हिसाब से पहले भी वोटिंग होती थी, अब भी हो रही है. हां, कुछ जगहों पर स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा जरूर बनता दिखा. कई गिरिराज सिंह का टिकट काटे जाने से भी नाराज रहे. इधर मतदाताओं के लिए यह बड़े उत्साह का मौका था, क्योंकि कई लोगों को एक साथ दो इवीएम पर बटन दबाने का मौका मिल रहा था.
