पशुपालन विभाग बकरी पालन के लिए दे रहा अनुदान
बड़े व छोटे पैमाने पर बकरी पालन के लिए विभाग ले रहा आवेदन
जिला में मीट कारोबार का बड़ा हिस्सा बाहर से आनेवाले बकरी व पाठा पर करता है निर्भर
नवादा नगर : जिले में स्वरोजगार के रूप में बकरी पालन में लोग धीरे-धीरे रुचि ले रहे हैं. बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्तर पर जिला पशुपालन विभाग, नाबार्ड, जीविका आदि द्वारा भी प्रशिक्षण व सरकारी सहायता दिलाने का काम किया जा रहा है. हाल के दिनों में सदर प्रखंड के मंगुरा गांव में मनरेगा से बकरी शेड बनाने के साथ जीविका के सहयोग से बकरी पालने के लिए जरूरतमंद लोगों को सहायता उपलब्ध करायी गयी है.पशुपालन विभाग के द्वारा बकरी पालन के लिए अनुदान के साथ स्कीम लाया गया है, इसका लाभ सामान्य वर्ग के लोगों के साथ ही पिछड़े व एससी कोटि के लोग ले सकते हैं. सरकारी योजना में बकरी पालन के इच्छुक लोगों को अनुदान की सहायता भी हो रही है. गांवों में तो बकरी को गरीबों का एटीएम भी कहा जाता है.
मीट का है बड़ा कारोबार : जिला में खस्सी के मीट का बड़ा कारोबार है. जिला मुख्यालय सहित अन्य सभी स्थानों पर पर्व-त्योहार के साथ ही सामान्य दिनों में इसकी नियमित काफी खपत है. स्थानीय कारोबारियों को एक स्थान पर बड़े पैमाने में बकरी या खस्सी की उपलब्धता नहीं हो पाती है. स्थानीय दुकानदारों के अनुसार त्योहारों की तैयारी के लिए एक डेढ़ माह पहले से ही गांवों से फुटकर तरीके से खस्सी की खरीदारी करनी पड़ती है. जिला में छोटे स्तर पर बकरी का पालन हो रहा है, लेकिन बड़े पैमाने पर फिलहाल कोई विशेष यूनिट नहीं है, जहां से सौ से दो सौ पीस एक साथ खरीदा जा सके.
सरकारी स्तर पर मिल रही है मदद : बकरी पालन के लिए इच्छुक लोगों को सरकारी स्तर पर मदद करने की योजना पशुपालन विभाग द्वारा शुरू किया गया है. पूर्व से बकरी पालन कर रही इकाई को 40 व 20 की यूनिट बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर दो चरणों में अनुदान देकर यूनिट को बढ़ाने में मदद की जायेगी. जांच के बाद स्वलागत से शुरू किये गये बकरी पालन केंद्र को यह मदद मिलनी है. जिला में 40 यूनिट के लिए 6 तथा 20 यूनिट वाले बकरी पालन केंद्र की शुरुआत के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान के साथ प्रशिक्षण आदि की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. पशुपालन विभाग में इसके लिए आवेदन किया जा सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा आवेदन लिया जा रहा है. 20 व 40 बकरियों के पालन केंद्र बनाने के लिए सरकारी स्तर पर अनुदान भी मिल रहा है. बकरी पालकों को पहले अपने स्तर पर बकरी पालन का केंद्र शुरू करना है. बाद में जांच कर सही पाये जाने पर अनुदान का लाभ बैंकों के माध्यम से दिलाया जायेगा.
संजय कुमार, जिला कुक्कुट पदाधिकारी
प्रशिक्षण व इलाज की भी होगी सुविधा
बकरी पालकों को समय-समय पर बकरियों में होनेवाली बीमारियों के इलाज, इनके रहन-सहन, खान-पान आदि के बारे में जानकारी दी जाती है. सामान्य तौर पर बकरी को पालने में खास परेशानी नहीं होती है. बाजार में बकरी के वजन के अनुसार 350 से 500 रुपये प्रति किलो तक मीट बिकता है. पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि जिला में बड़े स्तर पर बकरी पालन का रोजगार करनेवाले अभी कम हैं, जबकि यहां मार्केट में खपत की असीम संभावनायें हैं. जिला के मीट व्यापारी पश्चिम बंगाल या अन्य दूसरे स्थानों से सप्लाई मंगवाते हैं. बकरियों की बीमारियों का इलाज जिला के सभी पशु अस्पतालों में सहजता से हो जाता है.
पशुपालक कमा रहे लाभ
जिला में अकबरपुर के पटोरी गांव में सुधीर कुमार, सदर प्रखंड के ओढ़नपुर गांव के अमित कुमार सहित वारिसलीगंज प्रखंड के कुछ गांवों में पशुपालक बकरी पालन का काम करते हैं. पटोरी गांव के सुधीर कुमार के अपने फार्म में लगभग सौ बकरियों को पाले हुए हैं. बकरी पालन में मुख्य रूप से बकरियों के रखने के स्थान, उसके चारा तथा इलाज आदि के इंतजाम पर विशेष ध्यान देना होता है. हाल के दिनों में जिला में बकरियों को हुए पीपीआर बीमारी से कई बकरियों की मौत भी हो गयी थी. विभागीय स्तर पर इस्ट्रोटॉक्सिनिया, पीपीआर आदि रोगों से बचाव के लिए टीके आदि भी मुफ्त में लगाये गये हैं.
