एक पोल के पास ट्रेन पहुंचते ही बंद हो जायेगा फाटक, दूसरा पोल पार होते ही खुलेगा गेट
रेलवे को मॉडल भेजने की तैयारी में जुम्मन मिस्त्री
मात्र 60 हजार में रेलवे व यात्रियों को मिलेगी सुरक्षा
नवादा : बढ़ती रेल दुर्घटना व अपनी आंखों के सामने मानव रहित रेल समपार फाटक पर दुर्घटना को देखने के बाद नवादा के रामनगर निवासी अवधेश कुमार उर्फ जुम्मन मिस्त्री ने आॅटोमेटिक फाटक बना दिया़ जुम्मन ने मानव रहित रेलफाटक को बंद होने व खुलने के लिए ऑटोमेटिक सिस्टम बनाया है, जिससे रेलवे ही नहीं जन साधारण को भी इसका लाभ मिल सकेगा.
इस माॅडल को जुम्मन ने रेलवे को भेजने का मन बना लिया है. इसे बनाने में जुम्मन को छह माह का समय लगा है. इसमें उसने अपने पाॅकेट से करीब 60 हजार रुपये खर्च की है.
जुम्मन द्वारा ईजाद किया गया यह सिस्टम पूरे देश में मानवरहित रेल फाटक पर दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने में सहायक सिद्ध होगा. जुम्मन ने बताया कि इसे बनाने के लिए वह अपने एक भगना प्रमोद कुमार, जो शेखपुरा जिले के मसौढ़ा निवासी का रहनेवाला है, उससे आर्थिक सहयोग लिया है़
उसने कहा कि किऊल-गया रेलखंड ही नहीं पूरे देश में सैकड़ों मानव रहित रेलवे क्रासिंग हैं. जहां आये दिन रेल लाइन पार करने में दुर्घटनाएं होती रहती हैं. कुछ दिन पहले किऊल-गया रेलखंड पर स्थित वारिसलीगंज स्टेशन के समीप अनधिकृत रेल फाटक पर रेल पटरी पर एक बराती से भरी बोलेरो फंस जाने के बाद 13023 अप हावड़ा-गया एक्सप्रेस की चपेट में आकर आठ लोगों की मौत हो गयी थी. इस घटना को जुम्मन ने देखा था़ उसके बाद उसने ठान लिया कि एक ऐसा फाटक बनाया जाये, जहां आदमी नहीं रहे और सुरक्षा भी प्रदान हो सके.
उन्होंने बताया कि इसके अलावा कई अन्य रेल फाटक पर भी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं. उसने इस माॅडल का प्रदर्शन करते हुए बताया कि रेल लाइन के सटे एक पोल के सहारे इसका स्विच लगाया जाता है, जो ट्रेन आने के दौरान उस स्विच से टकराने पर फाटक आॅटोमेटिक गिर जाता है.
उस ट्रेन को फाटक पार करने के बाद दूसरे पोल के स्विच से टकराने पर फाटक आॅटोमेटिक खुल जाता है. इसके लिए उन्होंने एक बैटरी, साइकिल के फेरव्हील, चैन, तथा अन्य सामग्री की मदद ली है़ इसका डेमो बुधवार को जुम्मन मिस्त्री ने पत्रकारों के समक्ष प्रदर्शित किया है.
