क्लाइमेट चेंज. तापमान में उतार-चढ़ाव बन सकता है परेशानी का सबब
कृषि में भी नुकसान प्रभावित हो रही खेती
दिसंबर से जनवरी तक अधिकतम तापमान 26 डिग्री व न्यूनतम तापमान आठ डिग्री तक ही रहने की संभावना
दिन में गर्मी और रात में ठंड के कारण जन-जीवन पर पड़ रहा कुप्रभाव
नवादा : नवंबर से ही शुरू होनेवाली हाड़ कंपानेवाली ठंड दिसंबर के अंतिम दौर में भी नहीं शुरू हो सकी है. यह जन-जीवन के लिए शुभ संकेत नहीं है. आम लोगों को प्राकृतिक की इस विपदा का शिकार होना पड़ रहा है. इतना ही नहीं जानवरों और खेतीबाड़ी पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है.
मंगलवार को तापमान न्यूनतम आठ डिग्री और अधिकतम 29 डिग्री रेकाॅर्ड किया गया, जो इस बात का प्रमाण है कि प्राकृति इस बार कहर बरसाने के मूड में है. ऐसे उतार चढ़ाव वाले मौसम में लकवा, हर्ट अटैक, हाई ब्लडप्रेशर व मिजील्स जैसी खतरनाक बीमारियों के शिकार होने का डर बढ़ गया है. वहीं खेती में इन दिनों रबी फसलों के लिए घातक साबित हो रहा है. खास कर गेहूं की फसल काफी प्रभावित होने वाली है. ऐसे उतार-चढ़ाव वाले मौसम में हर लोगों को सावधान रहने की जरूरत पड़ गयी है.
इसके अलावा जानवरों को गर्म स्थान पर रखने व एक समान वातावण वाले स्थानों पर रखने की जरूरत है, ठंड नहीं पड़ने से उन दुधारू जानवरों का दूध उत्पादकता में कमी आने की संभावनाएं बढ़ गयी है. कुल मिला कर कहा जाये तो प्राकृतिक से खिलवाड़ करने का ही परिणाम है कि मौसम का रुख बदल गया है. तापमान मापक यंत्रों की माने तो दिसम्बर से लेकर जनवरी तक एक समान ही तापमान रहने की सम्भावनाएं सामने आ रही हैं.
इन दोनों महीनों में न्यूनतम अाठ डिग्री से अधिकतम 29 डिग्री तक तापमान रहने की रिपोर्ट सामने आ रही है. हालांकि मौसम में उतार चढ़ाव का खेल के चलते बीच-बीच में बादल व बारिश होने के साथ ही शीतलहर चलने की भी संभावना से लोग ऊहापोह की स्थिति में हैं. इधर जिला प्रशासन की ओर से इस तरह के ठंड में अलाव जलाने जिला को 50 हजार रुपये का आवंटन आया है, जिसे सभी प्रखंडों के अंचल अधिकारियों को अभी तीन-तीन हजार रुपये दिया गया है. परंतु अलाव जलाने का शुरुआत कहीं नहीं हो सका है, साथ ही समाजिक सुरक्षा कोषांग को बिहार सरकार के द्वारा गरीबों व असहायों के बीच कंबल वितरण को लेकर 3 लाख 86 हजार रुपयों का आवंटन आ चुका है बावजूद इसका कुछ भी सुगबुगाहट नहीं हो रही है.
ऐसे मौसम में बच्चों पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी
ऐसे मौसम में बच्चों पर ध्यान देना अत्यंत जरूरी हो गया है. नवजात बच्चों को 6 माह तक मां का ही दूध पिलाना चाहिए. साथ ही बच्चे हो या बड़े-बूढ़े सभी को पानी उबालकर उसे ठंडा कर पीने की जरूरत है.
बच्चों को भरपूर कपड़े पहनाना चाहिए व मच्छरों के प्रकोप से बचाने के लिये मच्छरदानी का प्रयोग करना अति आवश्यक है. इस मौसम में हर लोग बिमार पड़ रहे हैं इसका असर वायरल इंफेक्शन को बढ़ा दिया है जिससे उल्टी व पैखाना होने लगता है. इसके अलावा छोटी चेचक यानी मिजील्स का खतरा बढ़ चुका है. इस तरह के सीजन में सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है.
डाॅ अखिलेश कुमार मोहन, चाइल्ड स्पेशलिस्ट, सदर अस्पताल
वायरल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ा
टेंपरेचर वेरियेशन से वायरल इंफेक्शन का खतरा काफी बढ़ गया है. इस तरह के मौसम में एलीर्जी बिमारियों में निमोनिया, दम्मा, ब्रोनकाइटिस होता है. इसके अलावा भेक्टर बोन में मलेरिया, टायफाईड जो मच्छरों से फैलता है उसका सीजन नहीं रहने पर भी फैल रहा है.
दिसंबर माह में मच्छरों का प्रकोप समाप्त हो जाना चाहिए था लेकिन मौसम के उतार चढ़ाव से मच्छर नहीं समाप्त हो रहे हैं. इसके अलावा सबसे खतरनाक बीमारी हार्ट अटैक, लकवा तथा हाइब्लड प्रेशर की संभावनाएं पूरी तरह से बनती जा रही है.
डॉ प्रभाकर सिंह, सदर अस्पताल, जेनरल फिजिशियन नवादा
क्या कहते हैं पशुपालन अधिकारी
मौसम के उतार-चढ़ाव को लेकर दुधारू जानवर दूध प्रोडक्शन कम कर देते हैं. जानवरों को ऐसे स्थानों पर रखने की जरूरत है जहां उनके अनुकूल मौसम हो. जानवरों को बोरे का कभर से ढंक कर रखना चाहिए. उसके रहने वाले स्थानों पर हवा नहीं आये इसके लिये पुआल का भी व्यवस्था करना चाहिए व वेंडिलेटर तथा दरवाजों पर प्लास्टिक के बोरे से ढ़ंक कर रखना जरूरी है. जानवरों को गुड़ खिलाने से उनके अंदर गर्मी बरकरार रहती है. इसलिए उनके खान पान का भी ख्याल रखना जरूरी होता है.
डाॅ अनिरुद्ध प्रसाद, जिला पशुपालन पदाधिकारी,नवादा
क्या कहते हैं कृषि पदाधिकारी
देर से ठंड आने व मौसम का एक रूप नहीं रहने से इन दिनों रब्बी फसलों को खराबी पहुंच रही है. ठंड का व्यापक असर नहीं पड़ा तो गेहूं के बालियों में दाना आना मुश्किल हो जायेगा.
वैसे नवादा में पिछात खेती होती है इसलिए अभी भी उम्मीदें टिकी हुई है. मौसम के इस रवैये से कृषकों को काफी परेशानी झेलना पड़ रहा है. मौसम का असर ऐसा हुआ है कि इस बार ठंड नहीं पड़ी तो लक्ष्य पूरा करना भी मुश्किल हो जायेगा. वैसे पिछात खेती के लिये किसानों को गेहूं का बीज के-307 तथा के- 607 कम्पनी का ही प्रयोग करने पर लाभ मिल सकेगा.
सुनील कुमार, जिला कृषि पदाधिकारी,नवादा
