कई योजनाओं की गुणवत्ता पर उठाये सवाल

नवादा नगर : भटके हुए लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए धरातल पर उतर कर काम करना होगा. उक्त बातें केंद्रीय गृह मंत्रालय के अपर सचिव सह उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र प्रभारी विपिन बिहारी मल्लिक ने गुरुवार को आयोजित बैठक में कहीं. समाहरणालय सभागार में जिले के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व मीडियाकर्मियों के साथ […]

नवादा नगर : भटके हुए लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए धरातल पर उतर कर काम करना होगा. उक्त बातें केंद्रीय गृह मंत्रालय के अपर सचिव सह उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र प्रभारी विपिन बिहारी मल्लिक ने गुरुवार को आयोजित बैठक में कहीं. समाहरणालय सभागार में जिले के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों व मीडियाकर्मियों के साथ हुई बैठक में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के साथ जिले के ओवरऑल डेवलपमेंट पर चर्चा की गयी़ जिले के लिए विजन डाॅक्युमेंट बना कर प्लान-वे पर किस प्रकार से काम करते हुए जरूरतमंद लोगों को लाभ पहुंचाया जा सकता है, इस पर मंथन किया गया़

जिले की स्थिति का जायजा लेने आये अधिकारी ने कहा कि नक्सल जैसी समस्या के चलते लोगों तक सरकार की योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं पहुंच रहा है. योजनाओं की कमियों को ही उजागर कर लोगों के बीच आक्रोश भरा जाता है. मुख्य रूप से यातायात के साधन, शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार, स्किल डेवलपमेंट आदि की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए सबों को मिल कर काम करना होगा. देश के 115 नक्सल प्रभावित जिलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्लानिंग कमीशन द्वारा विशेष रूप के अपर सचिव व मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों को जिम्मा देकर व्यवस्था में सुधार के लिए काम शुरू किया गया है.नक्सल प्रभावित गोविंदपुर विधानसभा के विधायक प्रतिनिधि नारायण मोहन स्वामी सहित अन्य लोगों ने अपने सुझाव में शिक्षा को मुख्य रूप से ठीक करने की बात कही. लोगों में जागरूकता के अभाव के कारण कई बार समस्याएं बड़ी हो जाती हैं.

स्कूलों में एमडीएम, सरकारी स्कूलों के प्रोत्साहन योजनाएं, भवन, किताबें आदि में हो रही गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रशासनिक तंत्र फेल है. सरकंडा पंचायत में सकरी नदी पर पुल नहीं होने के कारण गांव तक पुलिस भी नहीं पहुंच पाती है. कादिरगंज से रूपौ, कौआकोल होते हुए जमुई के सोनो तक रास्ते को ठीक करने के साथ कुछ स्थानों पर पुल का निर्माण, हो ताकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र के बड़े हिस्से को यातायात से जोड़ा जा सके. गांवों में दबंगों के द्वारा सरकारीकर्मियों की मदद से जमीन हड़पने के काम, न्याय में असमानता, दबंगों द्वारा आर्थिक व शारीरिक शोषण, न्याय में असमानता आदि बिंदुओं को हाइलाइट करते हुए लोगों ने क्षेत्र में उग्रवाद बढ़ने के लिए सबसे बड़ा कारण बताया. रोड का स्टैंडर्ड पैमाना कम से कम 12 फुट है़

लेकिन, कई स्थानों पर इससे भी कम चौड़ी सड़क बनी हुई है. हमें दोष बताने के साथ जहां तक संभव हो सरकारी योजनाओं की लूट को रोकने के लिए जागरूक बना कर काम करने की जरूरत है. अपर सचिव ने कहा कि हर स्तर पर विकास के लिए मिल कर काम करने के लिए योजनाएं भी बनायी जायेंगी. बैठक में डीडीसी एमएस कैसर सुल्तान,एसपी विकास बर्मन,एसएसपी अभियान,रजौली एसडीपीओ उपेन्द्र कुमार,पकरीबरवां एसडीपीओ श्री प्रकाश सिंह,डीपीआरओ परिमल कुमार,जिला पर्षद चेयरमैन पुष्पा देवी,नगर पर्षद अध्यक्ष पूनम कुमारी सहित जिला के कई अधिकारी व जनप्रतिनिधि आदि मौजूद थे.

आशावादी बन कर करें काम, मिलेगा लाभ
केंद्रीय गृह मंत्रालय के अपर सचिव सह उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र प्रभारी विपिन बिहारी मल्लिक ने कहा कि आशावादी बन कर क्षेत्र में काम करने की जरूरत है. लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने की आवश्यकता है. रोड, भवन या अन्य विकास की जानकारी यदि लोगों तक पहुंचाया जाता है, तो वह खुद अपने अधिकार के लिए आगे आयेंगे.तकनीक को बढ़ा कर भी काम को सरल किया जा सकता है. रजौली प्रखंड के खटांगी आदि के दौरे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का काम तो गांवों में किया गया है, लेकिन जानकारी के अभाव में जैसे-तैसे बिचौलिये इसमें मुनाफा कमा लेते हैं. स्कूल का भवन बना है, लेकिन मानक नहीं है. एक ही क्लास में जमीन पर बैठ कर पहली से आठवीं तक के बच्चे पढ़ रहे थे. स्कूल में पांच कमरे हैं़ लेकिन, दो कमरे बंद पड़े हैं. सात साल पहले भवन बना लेकिन, आज तक प्लास्टर में लगने वाला प्लास्टिक छत से लगा हुआ था. शौचालय को किस प्रकार नाम का बना दिया गया, जिसकी उंचाई साढ़े पांच फुट से भी कम थी. अब इसमें प्रशासन से अधिक यदि गांव के लोग जागरूक होगें तो समस्या का समाधान संभव है.

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