पुण्यतिथि. प्रतिमा स्थापित, लगाये फलों के पौधे
स्वास्थ्य जांच कैंप लगा सत्संग व हुआ भंडारा
पकरीबरावां : खपुरा गांव के रहनेवाले व डुमरामा पंचायत के पूर्व मुखिया व पेंशनर समाज के अध्यक्ष रहे यदुनंदन शर्मा की प्रथम पुण्यतिथि उनके जन्म स्थल खपुरा में मनायी गयी़ इसमें प्रखंड व पंचायत के विभिन्न गांवों के ग्रामीण, जनप्रतिनिधि, विधायक, एमएलसी नीरज कुमार सहित कई लोगाें ने यदुनंदन की प्रतिमा पर फूल-मालाएं अर्पित कीं़
ग्रामीणों ने शर्मा की प्रतिमा को नगर भ्रमण कराते हुए समारोह स्थल पर लाया व शांति व उनके सद्गुणों तथा सामाजिक सरोकार से जुड़े विचारों की चर्चा करते हुए उनकी अष्टधातु से बनी मूर्ति की स्थापना जगत गुरु धर्मपीठाधीश्वर दीनदयाल शंकराचार्य जी महाराज, आचार्य अवधेश त्रिपाठी व यदुनंदन शर्मा के पुत्र अरविंद कुमार साही, मुकेश कुमार, राजेश कुमार, विनय कुमार ने की़ समारोह स्थल पर निवेदा हॉस्पिटल के सौजन्य से मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन भी किया गया.
इसमें सैकड़ों लोगों की स्वास्थ्य जांच कर उन्हें मुफ्त में दवाएं दी गयीं़ पीठाधीश्वर दीनदयाल जी महाराज व स्वर्गीय शर्मा की पत्नी तूना देवी, पुत्र,पुत्रवधु, पुत्री व परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से फल के सैकड़ों पौधे लगाये गये़ मौके पर सत्संग तथा बनारस के कलाकारों द्वारा भजन कीर्तन तथा भंडारे का आयोजन किया गया. वक्ताओं ने कहा कि कठिनाइयों को झेलते हुए आत्मबल के सहारे समाज में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हुए उन्होंने मुखिया का पद हासिल किया था.
वे अपने व्यक्तित्व एवं समाज जोड़ने से लेकर समाज में अच्छे कार्यों में भागीदारी लेने में दिलचस्पी रखते थे. उन्हें प्रखंड में हर तबके के लोग एवं हर समाज अभिवाभक के रूप में मान कर सम्मान दिया करते थे. उनके भाई सियाराम शर्मा ने बताया कि वह कृषक की थे. उन्होंने अपनी मेहनत व बुद्धि की बदौलत नौकरी भी हासिल की थी.
लगातार कई वर्षों तक जनसेवक के पद पर रह कर जनता की सेवा सेवक के रूप में करते रहे. वर्ष 1999 में सेवानिवृत्ति के बाद डुमरावां पंचायत की जनता ने 2001 में उन्हें मुखिया पद के लिए चुन लिया. खपुरा गांव के अलावा विभिन्न गांवों में भी विकास का कार्य लगन के साथ करवाया. इसी बीच उन्हें पेंशनर समाज का अध्यक्ष भी चुना गया. सदस्य भुवनेश्वर सिंह ने बताया कि पेंशनर समाज के कार्यों के लिए भी वे बढ़-चढ़ कर योगदान देते थे. समाज को अच्छी दिशा देने का काम जीवन भर उन्होंने किया. आज उनके तीनों पुत्र समाज के हर तबके के लोगों को अपने पिता के बताये रास्ते के अनुरूप सम्मान देने में जरा भी नहीं हिचकते.
