छोटे कारोबारी फाइन के चक्रव्यूह में

जीएसटी. मुंशी व वकील नहीं देते हैं कंपोजिशन की सही जानकारी विभाग ने बताया, व्यवसायियों की जानकारी के लिये खुला है ओपेन हाउस नवादा : जीएसटी लागू होने के कई माह बाद भी लोगों को समूचित जानकारी का आभाव है. जिससे छोटे कारोबारियों को आज भी परेशानी हो रही है.सरकार ने 75 लाख रुपये की […]

जीएसटी. मुंशी व वकील नहीं देते हैं कंपोजिशन की सही जानकारी

विभाग ने बताया, व्यवसायियों की जानकारी के लिये खुला है ओपेन हाउस
नवादा : जीएसटी लागू होने के कई माह बाद भी लोगों को समूचित जानकारी का आभाव है. जिससे छोटे कारोबारियों को आज भी परेशानी हो रही है.सरकार ने 75 लाख रुपये की सलाना टर्नओवर पर कम्पोजिशन की व्यवस्था की गई थी. इसमें उन छोटे कारोबारियों को तीन माह पर रिटर्न भरना होता है. इसका एक पोर्टल भी उस व्यवसायी के लिये बनाया गया है, जिससे वह अपना रिटर्न भर सकता है. कंपोजिशन नंबर लेने वाले कारोबारियों को राज्य बाहर से माल लाने व भेजने पर यह स्वतः समाप्त हो जाता है. लेकिन वर्तमान में कुछ छोटे कारोबारियों की समस्या यह हो गया है कि उनको पता भी नहीं चलता है कि उसका कंपोजिशन नंबर समाप्त हो गया है.
बाद में जब तीन माह पर टैक्स जमा करने की बारी आती है तो पता चलता है कि पोर्टल बंद है और टैक्स के साथ-साथ उनको जुर्माना भी देना होगा. हालांकि विभाग ने इस तरह की बातों को नहीं मान रही है. इसके बनाये गये नियमों में कहीं न कहीं गलती होने पर ही यह स्थिति उत्पन्न हुयी है.
वित्तीय वर्ष में जुर्माने का प्रावधान समाप्त होने की जानकारी विभाग को नहीं ़ वैसे केंद्र सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में जुर्माना का प्रावधान समाप्त कर दिये जाने की जानकारी दिया जा रहा है, जिसमें लोगों के जमा जुर्माना की राशि उनके खाते में लौटाने की बात सामने आ रही है. परंतु विभाग को अभी तक इसके लिये कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. विभाग के अधिकारी भी इस बात को मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने की बात कह रहे हैं. कहा जाता है कि जीएसटी लगने के पूर्व वैट के साथ रिटर्न पूरे देश में कारोबारियों को देना होता था,लेकिन बिहार के कारोबारियों को नहीं देना पड़ता था. परंतु, जब से जीएसटी लागू हुआ है, फाइन के साथ रिटर्न जमा करना पड़ रहा है.
7400 रुपये मांगा जा रहा जुर्माना
जीएसटी में छोटे कारोबारियों कंपोजिशन व्यवस्था लागू की गयी थी़ इसमें कंपोजिशन नंबर लेने के बाद तीन माह पर रिटर्न भरना था. जब रिटर्न भरने मुंशी के पास गया तो पता चला कि कंपोजिशन नंबर अब जेनरल हो गया है. इसलिए रिटर्न के साथ-साथ 74 सौ रुपये बतौर जुर्माना मांगा जा रहा है.
अभिषेक जैन, व्यवसायी,नवादा
कंपोजिशन नंबर के नाम पर कर रहे परेशान
कंपोजिशन नंबर के नाम पर कारोबारियों को परेशान किया जा रहा है. छोटे कारोबारी इससे काफी परेशान हैं. ऐसी हालात में व्यवसाय करना भी मुश्किल होने लगा है. जिस मुंशी या वकील से काम लोग करा रहे हैं. अब वह लोग बात भी करना नहीं चाहते हैं.
विकास कुमार, व्यवसायी,नवादा
मुंशी व वकील के चक्कर में नहीं पड़ें व्यवसायी
जीएसटी लागू होने के बाद से ही सभी कारोबारियों को बताया जा रहा है कि वह किसी भी तरह का जीएसटी से संबंधित जानकारी लेना चाहते हैं तो विभाग का दरवाजा खुला हुआ है. इसके लिये प्रत्येक बुधवार को ओपेन हाउस खोला गया है. इसके साथ अन्य दिनों में भी यहां मौजूद ट्रेनर जानकारी देने के लिये नियुक्त हैं. कारोबारियों को अब सरकार ने काफी आसान व्यवस्था दे दिया है. वह किसी मुंशी और वकील के चक्कर में न पड़कर स्वयं रिर्टन फाइल कर सकते हैं. इससे जागरूकता भी बढ़ेगी और जानकारी भी हो जायेगा. लोगों के द्वारा जो भी समस्याएं विभाग को मिलती है उसका निदान स्थानीय स्तर पर नहीं होने पर उसे पटना हेडक्वार्टर फारवर्ड किया जाता है. इसके बाद उस व्यवसायी के मेल पर उसका निदान करने के बाद विभाग से रिपोर्ट भेज दी जाती है. अब व्यवसाइयों के लिये कंपोजिशन नंबर महंगा पड़ेगा, यदि जेनरल टैक्स देते हैं तो सस्ता पड़ेगा. लोगों को जानकारी देने के लिये विभाग में ट्रेनर संजय कुमार नियुक्त है.
गायत्री कुमारी आर्या, सहायक वाणिज्य कर आयुक्त,नवादा
जानकारी नहीं मिलने से हो रही परेशानी
जानकारी के अभाव में धोखाधड़ी हो रहा है. छोटे कारोबारी अपना पूरा लेखा-जोखा मुंशी और वकीलों के ऊपर निर्भर होकर काम करा रहे हैं, परंतु समय पर समुचित जानकारी नहीं मिलने से परेशानी उत्पन्न हो जा रही है.
पवन कुमार भदानी, व्यवसायी,नवादा

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >