हिसुआ : खादी के कपड़े खरीद कर खादी उद्योग को बढ़ावा दें. देश की आजादी में खादी की बड़ी भूमिका रही है. गांधी जी ने चरखा चला कर इसे बनाना शुरू किया और अंग्रेजों के कपड़ों का बहिष्कार किया. ये बातें कैथिर मुखिया नीरज कुमार सैंपू ने मंगलवार को खादी ग्रामोद्योग के बिक्री व प्रदर्शनी केंद्र के उद्घाटन के मौके पर कहीं.
हिसुआ के नरहट रोड स्थित केंद्र पर मुखिया ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया सेवानिवृत शिक्षक चंदेश्वर प्रसाद ने कहा कि खादी हमारी देश की पहचान है. देश की इज्जत है. गांधी के आह्वान पर देश के लोगों ने इसे अपनाया. देश की यह पहचान अमिट रहे इसके लिए भी हम खादी को पहनें. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि खादी ग्रामोद्योग में केवल खादी ही नहीं अन्य कई जरूरत के सामान बिकते हैं, उसे अपना कर स्वरोजगार को बढ़ावा दे सकते हैं. मैनेजर सुरेश प्रसाद सिंह ने खादी के कपड़ों पर 20 प्रतिशत की छूट की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि खादी के प्रचार समेत गांधी के सम्मान के लिए इसकी शुरुआत गांधी जयंती पर की गयी़ उन्होंने सूती, रेशमी, ऊनी कंबल और पॉली वस्त्र पर 20 फीसदी की विशेष छूट देने की जानकारी दी़
मौके पर जनार्दन प्रसाद, त्रिवेणी प्रसाद, चंद्रमौली सिंह, युगल किशोर प्रसाद आदि उपस्थित थे. गांधी जयंती के मौके पर छतिहर गांव स्थित गांधी आश्रम में स्वतंत्रता सेनानी परमेश्वर सिंह की अध्यक्षता में कार्यक्रम हुआ. परमेश्वर सिंह ने गांधी के विचारों को बड़ी जरूरत बतायी. राजनीति में नेता के साथ उनके समर्थक काफी नीचे आ गये हैं.
देश को रसातल में ले जाया जा रहा है. ऐसे में महात्मा गांधी के पद चिन्हों पर चलने की जरूरत है. मौके पर सत्यपाल कुमार, विजय पंडित, विजय कुमार, कृष्णनंदन सिंह, भोलानाथ सिंह, कृष्णा सिंह, दिनेश सिंह, वरीय प्रेरक रामाशीष कुमार, विकास कुमार, रंजीत कुमार आदि उपस्थित थे.
