आमस : पिछले पांच वर्षों से नक्सली संगठनों द्वारा आमस थाना क्षेत्र में बड़ी घटना को अंजाम दिया जाना इस बात का प्रमाणित करता है कि यह इलाका नक्सलियों के सॉफ्ट टारगेट में शामिल है.
यही कारण है कि नक्सली इस इलाके में तांडव मचा कर आसानी से फरार हो जाते हैं. आंकड़ों के अनुसार 23 मार्च 2010 को हथियारबंद नक्सलियों ने साव कला के समीप जीटी रोड पर स्थित टॉल प्लाजा पर रात्रि में हमला करके दो राइफल, 14 बंदूकें व करीब ढाई लाख रुपये लूट लिये थे. इस हमले में वकील सिंह नामक एक गार्ड की मौत भी हो गयी थी.
23 फरवरी 2014 को नक्सलियों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी करके जीटी रोड के किनारे स्थित आमस थाना पर हमला कर दिया था. लेकिन प्रशंसा करनी होगी थाना में मौजूद जवानों की, जिन्होंने नक्सलियों को मुंहतोड़ जवाब देकर पीछे हटने को मजबूर कर दिया था. अगर जवान हिम्मत हार जाते तो उस दिन आमस थाना से अनेक हथियार लूट लिये जाते व लोहा लेने वाले जवानों को भी शायद नहीं बख्शा जाता.
इसी तरह 25 मई 2015 को जीटी रोड से गुजर रहे 30 वाहनों को नक्सलियों ने जला कर कोहराम मचा दिया था. इस नक्सली वारदात की चर्चा पूरे देश में हुई थी व पुलिस महकमा हिल गया था. इधर, जुलाई 2016 में आमस-मदनपुर व बांके बाजार की सीमा पर स्थित डुमरीनाला के घने जंगल में नक्सली-पुलिस मुठभेड़ में कोबरा के दस जवान शहीद हो गए थे. इस घटना को लेकर पुलिस के आला अधिकारी देर रात तक आमस थाना में डटे रहे थे. इस घटना के बाद कोहराम मच गया था.
बहुत मुश्किल से दूसरे दिन शव को आमस खेल मैदान में लाया गया था व वहां से शवों को बीएसएफ के हेलीकॉप्टर से गया भेजा गया था. इस घटना से भी पुलिस महकमा सकते में आ गयी थी. अकौना पंचायत के शेखबिगहा पुल निर्माण में भी अप्रैल व मई 2017 के महीने में करीब छह बार नक्सलियों ने कैंप पर हमला करके गोलीबारी किया व दहशत फैला कर लेवी की मांग की थी.
ताजा वारदात सोमवार रात की है जहां सोलर पॉवर प्लांट को तबाह करके नक्सलियों ने एक बार फिर आमस को निशाना बनाया है. हालांकि अभियान एएसपी अरुण कुमार कहते हैं कि भाकपा माओवादी की कमर टूट चुकी है और वे अपनी मौजूदगी का एहसास दिलाने के लिये इस तरह की घटना को अंजाम दे रहे हैं.
