अधिकारियों के लौटते ही सजने लगती हैं दुकानें

नवादा : शहर को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से चलाया गया अतिक्रमण अभियान अब मुंह देखी अभियान बन गया है. गरीब, तो उजड़ गये पर जिनकी पहुंच साहबों व उनके कर्मियों के बीच मजबूत बनी है उनका कोई कुछ नहीं बिगड़ सका है. 25 अगस्त से शहर में शुरू किया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान के […]

नवादा : शहर को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से चलाया गया अतिक्रमण अभियान अब मुंह देखी अभियान बन गया है. गरीब, तो उजड़ गये पर जिनकी पहुंच साहबों व उनके कर्मियों के बीच मजबूत बनी है उनका कोई कुछ नहीं बिगड़ सका है. 25 अगस्त से शहर में शुरू किया गया अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद यह स्थिति सामने आ गयी है. जिलाधिकारी कौशल कुमार के द्वारा इस अभियान को शुरू करने पर उन फुटपाथी दुकानदारों में एक नयी उम्मीद जगी थी कि शायद उन गरीबों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था होगी़ परंतु, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ और उन गरीबों का रोजी-रोजगार छिन गया.

बावजूद मरता क्या नहीं करता़ प्रशासनिक अिधकािरयों के जाने के बाद पुनः उसी स्थान पर दुकानें सजने लगीं़ यह एक सिलसिला बन गया है. सबसे बड़ी बात, तो यह है कि अभियान में वैसी कई दुकानें देखी गयीं, जो सरकार जमीन पर हैं़ बावजूद उसे छोड़ कर उसके अगल-बगल वालों के आशियानों को उजाड़ दिया गया़ अब जब पर्व-त्योहार का समय आया, तो उन फुटपाथी दुकानदारों में चिंता होने लगी है. पर, कोई सुननेवाला नहीं है. हालांकि शहर को व्यवस्थित करना भी जरूरी है. इसके लिए जिला प्रशासन को एक व्यवस्था करनी चाहिए थी, जो नहीं की जा सकी है.

प्रजातंत्र चाैक से मेन रोड व खुरी नदी तक का हाल
अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत जिला प्रशासन के अधिकारियों के द्वारा दोरंगी नीति अपनाये जाने का मामला 29 अगस्त को साफ देखा गया. इसके खिलाफ लोगों का गुस्सा भी रहा, परंतु गरीबों की सुननेवाला कोई नहीं था. प्रजातंत्र चौक से मेन रोड होते हुए खुरी नदी पुल तक अतिक्रमण को हटाया गया़ इसमें मेन रोड में कई दुकानों के आगे नाली पर पक्का बरामदा बना था़ इसके अलावा कुछ लोगों ने अपने छज्जे को सुंदर ढंग से कवर कर अतिक्रमण कर रखा था.
लेकिन, अतिक्रमण हटाने आये सीओ तथा टाउन इंस्पेक्टर ने उसे नजरंदाज कर दिया. जबकि उसके अगल-बगल की दुकानों के छज्जों को तोड़ दिया गया था. इसपर स्थानीय लोगों ने पक्षपात का आरोप लगाया है. मेन रोड में भदानी गली के पास के सभी दुकानों के आगे बने करकट के छज्जों और स्थायी निर्माण को हटा दिया गया था. जबकि बगल में बने होलमार्क जेवर की दुकान के छज्जे व पक्का बना कर ऊंचा किये गये बरामदा को नहीं तोड़ा गया.
व्यवस्था से नाराज दुकानदारों ने किया था आंदोलन
फुटपाथी दुकानदारों ने जुलूस निकाल पर सरकार व प्रशासन के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया है. असंगठित कामगार महासंघ के बैनर तले शहर में अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत बेरोजगार हुए फुटपाथी दूकानदारों ने पूरे शहर में प्रदर्शन किया और प्रजातंत्र चैक पर सभा कर अपनी बात रखी. कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि फूटपाथी दुकानदारों को उजाड़ने का काम नीतीश सरकार के राज में किया जा रहा है.
वैकल्पिक व्यवस्था किये बिना शहर के सभी फुटपाथियों को उजाड़ने का काम प्रशासन ने किया है इससे दुकानदारों के परिजनों के सामने भूखों मरने की नौबत आ गयी है. एक तरफ सुशासन की सरकार गरीबों को राजी-रोटी का अधिकार देने की बात कहती है और जो किसी तरह मेहनत करके अपना और परिवार के सदस्यों का पेट पाल रहे हैं, उन्हें उजाड़ दिया गया है. सरकार पूंजीपतियों को पनाह देने व छोटे व्यापारियों को मारने का काम करने का आरोप लगाया था. बावजूद उनके आंदोलन पर प्रशासन ने गंभीरता से लेने का काम नहीं किया
फुटपाथी दुकानदारों का पेट पालना मुश्किल
शहर में जब प्रशासन ने 25 अगस्त को अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया, तो ऐसा लगा जैसे सड़क किनारे बैठे फुटपाथी दुकानदारों पर जैसे वज्रपात हो गया हो. उसके बाद से अभी तक फुटपाथ पर रोजगार करने वाले सहमे हुए हैं. अतिक्रमण हटाओ अभियान की सबसे बड़ी मार गरीब तबके के ठेला व खोमचा लगा कर अपना गुजारा करनेवालों पर पड़ा है. शहर में ठेला वेंडर आदि का सर्वे कर उन्हें सहूलियत देने की बात कही गयी है, लेकिन वह छलावा साबित हुआ है. सड़क पर ठेला लगाने के बजाय यदि इन ठेला चालकों का स्थायी समाधान करते हुए पक्का दुकान या वेंडर जोन एरिया डेवलपमेंट कर दिया जाता है तो निश्चित ही एक बेहतर परिणाम देखने को मिल सकता था. पिछले वर्ष भी अगस्त माह में अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई तो की, थी लेकिन बाद में स्थिति पहलीवाली ही बन गयी. खुरी नदी पुल के नीचे और बरहगैनिया पइन के पास वेंडर जोन बनाने के लिए विचार किया गया था, जिस पर आज तक पहल नहीं की गयी़ ठेलाचालकों को यदि एक स्थायी जगह दे दी जायेतो वह निश्चिंत होकर अपना व्यापार भी कर सकेंगे.

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