मत्स्य पालन कर किसान कर रहे तीन गुना ज्यादा कमाई

जिले में 897.95 हेक्टेयर में तालाब और आहर सरकारी आहर और तालाबों की संख्या 436 केंद्र व राज्य ने मत्स्य पालन में चला रखी हैं कई योजनाएं नवादा : जिले में मत्स्य पालन रोजगार से आर्थिक मजबूती का एक बड़ा साधन बन गया है. इसके लिये किसानों को जागरूक होकर मत्स्य पालन के क्षेत्र में […]

जिले में 897.95 हेक्टेयर में तालाब और आहर
सरकारी आहर और तालाबों की संख्या 436
केंद्र व राज्य ने मत्स्य पालन में चला रखी हैं कई योजनाएं
नवादा : जिले में मत्स्य पालन रोजगार से आर्थिक मजबूती का एक बड़ा साधन बन गया है. इसके लिये किसानों को जागरूक होकर मत्स्य पालन के क्षेत्र में आगे आने की जरूरत है. मत्स्य पालन में जागरूकता लाने के लिये केंद्र व राज्य सरकार ने कई तरह की योजनाएं चला रखी है.
जिसके माध्यम से अनुदान दिया जा रहा है. जिले में अभी 897.95 हेक्टेयर में सरकारी तालाब व आहर है, जिसकी संख्या 436 है. इस रोजगार के क्षेत्र में मत्स्य विभाग इच्छुक किसानों को प्रशिक्षण देकर नयी वैज्ञानिक पद्धति के लिये पारंगत कराने में जुटी है. मत्स्य से जुड़े लोगों को विभाग द्वारा दो तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जिसमें एक प्रशिक्षण राज्य स्तर का व दूसरा प्रशिक्षण अंतर्राज्यीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इससे जुड़े किसानों की आर्थिक स्थिति काफी सुदृढ़ होने की बात कही जा रही है.
जो लोग मत्स्य पालन में जुड़े हैं, उनकी आर्थिक स्थिति काफी बेहतर हो गया है. अन्य कृषि कार्याें की तरह उतना मेहनत करने की भी जरूरत नहीं है, यानी कम खर्च और कम मेहनत में मोटी कमाई का एक बेहतर विकल्प बन कर उभरता जा रहा है.
क्या हैं सरकार की योजनाएं: भारत सरकार का नीली क्रांति योजना के तहत नया तालाब बनाने के लिये आवेदन लेने की प्रक्रिया चल रही है. इसमें लागत 5 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर आता है. इसके लिये केन्द्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है. प्रथम वर्ष इनपुट के लिये जीरा, दवा व खाद्य के लिये 1. 5 लाख प्रति हेक्टेयर लागत आती है, जिसमें 50 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है.
अनुसूचित जाति के लिये विशेष लाभ दिये जाने का प्रावधान है. इसमें 8 डिसमिल से 50 डिसमिल तक जल क्षेत्र निर्माण करने का आरक्षण दिया गया है. इसके साथ ही अनुसूचित जाति को 90 प्रतिशत अनुदान भी दिया जा रहा है. अनुसूूचित जाति को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने यह सुविधा दे रखा है. नर्सरी तालाब निर्माण में 1.51 लाख लागत आयेगी. इसके लिये 11 एकड़ लक्ष्य दिया गया है.
इसके लिये आवेदन लेने की प्रकिया चल रही है. इस योजना के लिये वर्क आर्डर देने का काम 15 अक्टूबर के बाद ही किया जायगा. अनुसूचित जाति के लिये ट्यूबवेल पंपसेट योजना में कम से कम 40 डिसमिल जल क्षेत्र का पोखर होना जरूरी है. बोरिंग में 50 हजार व पंपसेट में 25 हजार लागत खर्च है. इसके लिये भी 90 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है.
मोपेड सह आइस बाक्स योजना: यह योजना केवल मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्यों के लिये ही लागू किया गया है. इसमें अनुदान 70 प्रतिशत है. इसके लिये 10 लोगों का लक्ष्य जिले भर में निर्धारित किया गया है, जिसमें 13 लोगों ने आवेदन दे दिया है. ऐसी हालत में समिति द्वारा जिसका सबसे कम आय है,उसको प्राथमिकता दी जाती है.
क्या कहते हैं किसान
अपने पोखर के माध्यम से थोड़ा-बहुत मत्स्य पालन का काम किया करते थे. लेकिन कमाई पता नहीं चलता था. वर्ष 2005-06 में विभाग से ट्रेनिंग मिलने के बाद व सहयोग के बाद रोजगार काफी बढ़ गया है व दुगुनी कमाई होने लगी है.
तरूण कुमार, काशीचक
वर्ष 2004 से मत्स्य के क्षेत्र मे अपना काम शुरू किये थे. गांवों में लोगों को देख कर यह काम शुरू किया. विभाग के मदद से आज बेहतर कमाई का साधन हो गया है. इसमें कम लागत से ज्यादा कमाई होती है.
राजीव रंजन राय,अपसढ़ वारिसलीगंज
वर्ष 1988 से ही मछली पालन का काम करते आ रहे हैं. परंतु कुछ फायदा समझ में नहीं आ रहा था. लेकिन वर्ष 2006 में कांकीनाड़ा बिहार सरकार द्वारा ट्रनिंग के लिये भेजा गया, तब से कमाई चार गुणा बढ़ गया है.
घनश्याम प्रसाद, पैंगरी वारिसलीगंज
क्या कहते हैं अधिकारी
मत्स्य पालन के लिये विभाग ने कई लाभकारी योजना चला रखी है, जिससे किसानों को कई गुणा कमाई भी होने लगी है. मत्स्य क्षेत्र लोगों के लिये बेहतर कमाई का साधन है. परंतु लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं. इसके लिये दो तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है पहला प्रशिक्षण पटना में व दूसरा प्रशिक्षण मध्य प्रदेश के होशांगाबाद जिला स्थित पावाखेड़ा में दिया जा रहा है. प्रशिक्षण लेने वालों को योजनाओं के लाभ में प्राथमिकता दी जा रही है. विनय कुमार, जिला मत्स्य पदाधिकारी
मत्स्य अंगुलिका वितरण योजना
इसमें 2.5 लाख बीज वितरण का लक्ष्य है. जिसमें अनुदान 50 प्रतिशत दिया जा रहा है. इसके लिये प्रति अंगुलिका मत्स्य का कीमत 2.5 रुपये निर्धारित है. इसमें अंगूलिका बीज बेचने के लिये 3 लोगों का आवेदन लिया जा चुका है, जिनके द्वारा खरीदार को दिया जाना है. अंगूलिका के लिये अब तक 25 आवेदन विभाग को प्राप्त हो चुका है. खरीदार को पूरी रकम देकर खरीदने के बाद किसान के खाते में अनुदान की राशि भेजा जाता है.
तालाब या आहर में मरनेवाली मछलियों के लिए सहायता का प्रावधान नहीं
तालाबों या आहर में किसी बीमारी या अन्य कारणों से मछलियों की मौत होती है तो वैसी परिस्थिति में विभाग या सरकार द्वारा सहायता देने का कोई प्रावधान नहीं है. लेकिन बाढ़ या सुखाड़ के कारण मछलियां मरती है तो वैसी परिस्थिति में सहायता का प्रावधान दिया गया है.
सामान्य के लिए मुख्यमंत्री मत्स्य विकास योजना
इस योजना के तहत रियरिंग तालाब योजना में सामान्य वर्ग को 7 हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित है.जिसके लिये अभी तक 5 आवेदन लिया गया है. इसमें इकाई लागत 6 लाख रूपये है. इसमें प्रति हेक्टेयर किसानों को 50 प्रतिशत ही अनुदान दिया जाना है और प्रथम वर्ष इनपुट के लिये 1.50 प्रतिशत अनुदान है. इसमें ट्यूबवेल का अनुदान भी 50 प्रतिशत ही है.

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