दो से तीन अस्पतालों के प्रभार में हैं एक पशु चिकित्सक
बाढ़पीड़ितों की मदद के लिए भेजे गये दो पशु डॉक्टर
नवादा नगर : जिला पशुपालन विभाग के द्वारा विभिन्न स्थानों पर संचालित हो रहे 36 पशु अस्पतालों को संभालने के लिए महज 19 पशु चिकित्सक ही कार्यरत हैं.
एनिमल डॉक्टरों की कमी के कारण दो से तीन अस्पतालों का जिम्मा एक ही डॉक्टरों पर है. पशुपालन विभाग को स्वास्थ्य सेवा बेहतर बनाते हुए सातों दिन चौबीसों घंटे काम करने वाला संस्थान को घोषित कर दिया गया है, लेकिन डॉक्टरों व संसाधनों के अभाव के कारण पूरा तंत्र बेकार है.
अधिकतर अस्पताल तो प्रतिदिन खुल भी नहीं पाता है. कर्मियों व डॉक्टरों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के इलाज का काम प्रभावित होता है. प्राइवेटस्तर पर काम करनेवाले झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे ही गांववाले अपने पशुओं का इलाज करवाने को बाध्य होते हैं. पशु चिकित्सालय में 24 घंटे सातो दिन अस्पताल को खुला रख कर पशुओं का इलाज करने का आदेश राज्य कार्यालय द्वारा दिया गया है.
इसका स्पष्ट मतलब है कि शिफ्ट का निर्धारण कर ही डॉक्टरों व कर्मियों की ड्यूटी लगायी जानी है. लेकिन, जब एक ही डॉक्टर दो से तीन जगह का प्रभार लिए हुए हैं, तो पूरे 24 घंटे किस प्रकार से सभी स्थानों पर एक डॉक्टर काम कर सकता है. पशु अस्पताल में इलाज के लिए लाये जानेवाले पशुओं को सहीं प्रकार से इलाज का लाभ मिल पायेगा, इसमें संदेह लगता है. अस्पताल में भी संसाधनों की कमी है. दवा की पर्याप्त मात्रा बतायी जाती है, लेकिन जरूरत पर पशुपालकों को बाजार से कुछ दवाओं को खरीदना पड़ता है.
गंभीर पशुओं की जान बचाना होता है मुश्किल
पशुओं में होनेवाली जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए गांवों में कारगर उपाय नहीं है. पशुपालक यदि इलाज के लिए पशुओं को अस्पताल तक ले भी आते हैं, तो उसका इलाज हो पायेगा या नहीं इसे जाननेवाला कोई नहीं है. जिला मुख्यालय में भी हर समय इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है.
प्रखंड मुख्यालयों के अलावा कुछ पंचायत मुख्यालयों में भी पशुपालन विभाग के अस्पताल खुले हुए हैं. बरसात के मौसम में पशुओं को होनेवाले रोगों में भी वृद्धि हो जाती है. खुरहा रोग, दस्त, बारिश में भीगने के कारण बुखार या सर्दी जुकाम के साथ गलाघोंटू, लंगड़ी आदि बीमारियां इस मौसम में आसानी से अटैक करती हैं.
जिले में 19 पशु चिकित्सक कार्यरत हैं. कुछ दिन पहले ही अनुबंध पर काम कर रहे दो डॉक्टरों का कार्यकाल पूरा हो गया है. दो डॉक्टरों को बाढ़ पीड़ित क्षेत्र में लगाया गया है. सभी अस्पतालों में पूरे समय तक इलाज संभव नहीं हो पाता है. गलाघोंटू व लंगड़ी रोग के लिए जो टीकाकरण का अभियान की मॉनीटरिंग में भी परेशानी आती है.
डॉ श्याम सुंदर प्रसाद, जिला पशुपालन पदाधिकारी
