National Handloom Day 2026: बिहार के स्थानीय बुनकरों की कला को सलाम, तस्वीरों में देखें हस्तकरघा की समृद्ध परंपरा

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National Handloom Day 2026: बिहार के स्थानीय बुनकरों की कला को सलाम, तस्वीरों में देखें हस्तकरघा की समृद्ध परंपरा
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National Handloom Day 2026: बिहार के स्थानीय बुनकरों की कला को सलाम, तस्वीरों में देखें हस्तकरघा की समृद्ध परंपरा

बदलती जीवनशैली में बिहार की हथकरघा कला आधुनिकता के साथ उभर रही है. सरकारी योजनाओं और युवा पीढ़ी के प्रयासों से गया, भागलपुर और मधुबनी की हस्तकलाएं हजारों परिवारों की आजीविका बन रही हैं. आइए तस्वीरों में देखें समृद्ध परंपरा

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डिजिटल प्लेटफॉर्म

डिजिटल प्लेटफॉर्म से बढ़ा बाजार

बुनकरों को राष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए इंडिया हैंडमेड पोर्टल और जेम (GeM) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए गए हैं. वहीं बुनकर मुद्रा योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 32 बुनकरों को 23.90 लाख रुपये तथा वर्ष 2025-26 में सात बुनकरों को 8.50 लाख रुपये का ऋण दिया गया.

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भागलपुरी सिल्क

भागलपुरी सिल्क और बावन बूटी की बढ़ी मांग

राजधानी पटना समेत पूरे बिहार में पारंपरिक वस्त्रों की मांग लगातार बढ़ रही है. 'वोकल फॉर लोकल' अभियान के बाद स्थानीय बुनकरों के उत्पादों को नया बाजार मिला है. बिहार म्यूजियम की स्मारिका दुकान पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. यहां नालंदा की प्रसिद्ध बावन बूटी खादी साड़ियां, भागलपुरी सिल्क और खादी कॉटन के वस्त्रों की अच्छी बिक्री हो रही है.

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टेक्सटाइल-लेदर फैक्ट्री

मधुबनी में 400 करोड़ रुपये की टेक्सटाइल-लेदर फैक्ट्री

मधुबनी के पंडौल में 400 करोड़ रुपये की लागत से टेक्सटाइल एवं लेदर फैक्ट्री की शुरुआत की गई है. इससे करीब 12 हजार लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है. चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना के अनुसार बिहार में 7,216 हथकरघा बुनकर और 5,631 संबद्ध कर्मचारी हैं. यानी कुल 12,847 लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं.

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हस्तनिर्मित उत्पाद

कैदियों के हस्तनिर्मित उत्पाद भी बन रहे आकर्षण

बिहार म्यूजियम की स्मारिका दुकान में राज्य के विभिन्न कारागारों में बंद कैदियों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पाद भी बेचे जा रहे हैं. इससे उन्हें सम्मानजनक आजीविका और हुनर को पहचान मिल रही है. इन उत्पादों की कीमत 700 रुपये से लेकर 7000 रुपये तक है.

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मेगा हथकरघा क्लस्टर

भागलपुर में 5.28 करोड़ रुपये का मेगा हथकरघा क्लस्टर

भागलपुर में 5.28 करोड़ रुपये की लागत से मेगा हथकरघा क्लस्टर विकसित किया गया है. यहां आधुनिक डाई हाउस, डिजाइन स्टूडियो, उत्पाद विकास केंद्र और 10 ब्लॉक स्तरीय क्लस्टर स्थापित किए गए हैं. इससे बुनकरों को आधुनिक तकनीक और बेहतर उत्पादन सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं.

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गया का पटवा टोली

गया का पटवा टोली बना वस्त्र उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र

गया का पटवा टोली बिहार के वस्त्र उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र है, जिसे 'बिहार का मैनचेस्टर' कहा जाता है. यहां लगभग 11 हजार पावरलूम, एक हजार औद्योगिक इकाइयां और सैकड़ों हैंडलूम संचालित हैं. यहां गमछा, बेडशीट, धोती, पीतांबरी और गद्दे के खोल का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. यहां निर्मित वस्त्र पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा और दक्षिण-पूर्वी राज्यों तक भेजे जाते हैं. इस क्षेत्र से 35 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है.

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लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट. नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है.

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