डायरिया से बचाव को टीमें तैनात

बिहारशरीफ : संभावित बाढ़ व सुखाड़ से होने वाली डायरिया व महामारी से बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुकम्मल व्यवस्था की है. इन बीमारियों से बचाव के लिए जिला से लेकर पीएचसी स्तर पर मेडिकल टीमें तैनात कर दी गयी है.गठित टीमें काम करनी शुरू कर दी है. मरीजों के इलाज को 24 […]

बिहारशरीफ : संभावित बाढ़ व सुखाड़ से होने वाली डायरिया व महामारी से बचाव के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने मुकम्मल व्यवस्था की है. इन बीमारियों से बचाव के लिए जिला से लेकर पीएचसी स्तर पर मेडिकल टीमें तैनात कर दी गयी है.गठित टीमें काम करनी शुरू कर दी है.
मरीजों के इलाज को 24 घंटे काम कर रही मेडिकल टीमें : डायरिया व महामारी के इलाज के लिए तैनात मेडिकल टीमें जिले के अस्पतालों में 24 घंटों काम करने में लगी है. जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में विशेष टीम काम कर रही है.
इसके अलावा जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी मेडिकल टीमों का गठन किया जा चुका है. मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक टीम में एक डॉक्टर व दो पारा मेडिकल स्टाफ काम करने में लगे हैं. पीएचसी स्तर पर गठित मेडिकल टीमों को सख्त निर्देश दिया गया है कि जिस क्षेत्र में डायरिया या महामारी फैलने की सूचना मिले. वहां तुरंत जाकर पीड़ितों का इलाज करें.
जिला मलेरिया विभाग में खुला नियंत्रण कक्ष : जिले वासियों के सुविधा के ख्याल से जिला मलेरिया विभाग में जिला नियंत्रण कक्ष खोला गया है. यह कक्ष काम कर रहा है. लोग चिकित्सा सेवा के लिए जिला नियंत्रण कक्ष के नंबर 06112-236786 पर संपर्क कर सकते हैं.
किसी भी तरह की शिकायत या सूचना उक्त नंबर पर दे सकते है. सूचना के पश्चात जरूरत पड़ने पर संबंधित क्षेत्रों में जिला मेडिकल टीम भेजी जायेगी. आवश्यकता अनुरूप टीम में शामिल डॉक्टर मरीजों का इलाज कर दवा उपलब्ध करायेंगे. मेडिकल टीमें तीन शिफ्टों में काम कर रही है.
अक्तूबर माह तक काम करेंगी मेडिकल टीमें :
चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए गठित मेडिकल टीमें अक्तूबर माह तक निरंतर काम करेंगी. टीम में शामिल चिकित्सक व कर्मी रोस्टर के मुताबिक ड्यूटी पर तैनात होंगे. सीएस के आदेश के आलोक में तैनात डॉक्टर व कर्मी अपने-अपने जगहों पर रोस्टर के अनुसार सेवा देने में लगे हैं.
कुओं में डाले जा रहे ब्जीचिंग पाउडर : कुओं के पानी को शुद्ध करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर डाले जा रहे हैं, ताकि बाढ़ के पानी से पेयजल दूषित नहीं हो पाये. स्वास्थ्य कर्मियों को निर्देश दिया गया है कि ब्लीचिंग पाउडर उसी कुएं में डाले जो बाढ़ के पानी से डूबा है.

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