बिहारशरीफ : इस बार रमजान में रोजा रखनेवालों के सब्र का असल इम्तिहान होगा. इस बार 36 साल बाद लगभग 16 घंटे का रोजा रखना होगा. इसलाम में रमजान को सबसे पवित्र महीना माना गया है. इस महीने में कुरान नाजिल हुआ (जमीन पर उतरा). जामा मसजिद के इमाम कारी तैयब अखलाकी ने बताया कि शाबान माह की 29 तारीख को चांद दिखाई पड़ा, तो 18 जून से रमजान शुरू होगा, नहीं तो 19 जून से रोजा की शुरुआत होगी.
इस बार रमजान का रोजा तकरीबन 15 घंटे 45 मिनट का होगा. रमजान में नेक करने का मौका मिलता है. किसी भी तरह की बुराई की इजाजत नहीं है. इस महीने में शैतान को जकड़ दिया जाता है. पैगंबर हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने फरमाया है कि रमजान दूसरों के गम बांटने का महीना है. यानी गरीबों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाये.
गरीबों को जरूर दें इफ्तार की चीजें : अगर आप 10 चीजें अपने इफ्तार के लिए लाते हैं, तो दो-चार गरीबों के लिए भी लाएं. अपने इफ्तार व सहरी की चीजों में गरीबों का भी ध्यान रखें.
अगर आपका पड़ोसी गरीब है, तो उसका खास तौर से ध्यान रखें. कहीं ऐसा न हो कि खुद खूब पेट भर खा रहे हों और पड़ोसी थोड़ा खाकर सो रहा हो.
गुनाहों से माफी मांगने का महीना है रमजान : रमजान के महीने में अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगनी चाहिए और दूसरों की भलाई करनी चाहिए. यह भी गौर करनेवाली बात है कि रोजे का मतलब सिर्फ भूखा -प्यासा रहना नहीं है, बल्कि गरीबों की उस भूख-प्यास को महसूस करना है, जिन्हें बिना खाये-पीये या आधा पेट दिन गुजारना पड़ता है.
