घर-घर जाकर तलाश किये जायेंगे कालाजार के रोगी

बिहारशरीफ : कालाजार पर नियंत्रण करने के लिए ठोस रणनीति बनायी गयी है. इस रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए विभागीय तौर पर पहल शुरू कर दी गयी है. संदिग्ध रोगियों की पहचान के लिए होम-टू-होम सर्च कंपेन चलाया जायेगा, ताकि इस रोग पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके. यानी कि संदिग्ध […]

बिहारशरीफ : कालाजार पर नियंत्रण करने के लिए ठोस रणनीति बनायी गयी है. इस रणनीति को अमली जामा पहनाने के लिए विभागीय तौर पर पहल शुरू कर दी गयी है. संदिग्ध रोगियों की पहचान के लिए होम-टू-होम सर्च कंपेन चलाया जायेगा, ताकि इस रोग पर पूरी तरह से नियंत्रण पाया जा सके. यानी कि संदिग्ध रोगियों की पहचान होने की स्थिति में उसका समय पर चिकित्सीय जांच करायी जा सके. साथ ही चिकित्सीय जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित संदिग्ध कालाजार के रोगियों का इलाज शुरू किया जायेगा. संबंधित इलाकों में रोग प्रवाह जीवाणुओं के लारवा को खत्म करने की दिशा में दवा का स्प्रे सुनिश्चित किया जा सके.

डीएमओ कार्यालय करेगा खोजी टीम का गठन : कालाजार के संदिग्ध रोगियों की पहचान के लिए खोजी दलों का गठन किया जायेगा. गठित की जाने वाली खोजी टीम में चार-चार खोजी सदस्य शामिल किये जायेंगे. यानी की हरेक दल में चार-चार सदस्य होंगे. टीम में शामिल सदस्यों द्वारा हरेक दिन 200 घरों में दस्तक देने का काम करेंगे. घरों में दस्तक देकर घर के सदस्यों की जांच करेंगे. यानी की संदिग्ध रोगियों की पहचान करने का काम करेंगे.
माइक्रोप्लान बनाने में जुटा विभाग : जिला मलेरिया विभाग इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए माइक्रोप्लान बनाने में जुट गया है. कार्य योजना बनाकर खोज अभियान की शुरुआत की जायेगी. यह कंपेन फरवरी माह में शुरू होगा. माइक्रोप्लान बनाकर जिला मलेरिया विभाग राज्य मलेरिया विभाग को भेजेगा. वहां से स्वीकृति मिलने के बाद गठित टीम घर-घर जाकर संदिग्ध रोगियों की पहचान करेगी. मालूम हो कि वर्ष 2017 में जिले में कालाजार के कुल 24 रोगी चिह्नित हुए थे, जिसमें से दो पीकेडीएल शामिल हैं. नये साल में अब तक एक रोगी प्रतिवेदित हुए हैं. नगरनौसा में पिछले दिनों नये रोगी चिह्नित हुए थे, जिनकी चिकित्सा की जा चुकी है.
कालाजार पर नियंत्रण के लिए गठित होंगे खोजी दल
हरेक दल में शामिल होंगे चार खोजी सदस्य
संबंधित इलाकों में लारवा को खत्म करने के लिए दवा का होगा स्प्रे
कहते हैं अधिकारी
कालाजार के संदिग्ध रोगियों की पहचान करने के लिए फरवरी माह में खोजी अभियान शुरू किया जायेगा. अभियान को सफल बनाने के लिए माइक्रोप्लान बनाया जा रहा है. रोगियों की खोज करने के लिए खोजी दलों का गठन किया जायेगा. हरेक टीम में चार-चार खोजी सदस्य शामिल किये जायेंगे.
डॉ रवींद्र कुमार, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी, नालंदा
आशा भी करेंगी रोगियों की पहचान
खोजी दलों में आशा भी शामिल होंगी, ताकि पोषक क्षेत्रों में आसानी से संदिग्ध मरीजों की पहचान करने में टीम को सहूलियत होगी. इसके अलावा उस क्षेत्र के सब सेंटर में काम करनेवाली एएनएम व आशा के कार्यों पर मॉनीटरिंग करने का काम करेंगी. आशा के नामों का चयन संबंधित क्षेत्र की एएनएम करेंगी. नामितकर इसकी सूची संबंधित पीएचसी के प्रभारी को उपलब्ध करायेंगी. पीएचसी से सूची जिला मलेरिया कार्यालय को उपलब्ध करायी जायेगी.
2017 में चिह्नित हुए गांवों में चलेगा कंपेन
सरकार के मापदंड के अनुसार वर्ष 2017 में जिस गांव में एक भी कालाजार के संदिग्ध रोगी की पहचान हुई है, उस गांव में खोजी दल के सदस्य दस्तक देंगे. यानी की उस गांव के हरेक घर में खोजी दल के सदस्य जाकर संदिग्ध रोगियों की पहचान करने का काम करेंगे, ताकि सरकार के कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके. रोगी की पहचान होने पर उसे निकट के अस्पताल में जांच के लिए भेजेंगे, जहां पर आरके 39 कीट से ब्लड की जांच की जायेगी. जांच रिपोर्ट में यदि रोग की पुष्टि होती है तो उसका इलाज तुरंत शुरू किया जायेगा.

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