बिहारशरीफ : जिला न्यायालय स्थित किशोर न्याय परिषद में नौ वर्ष पूर्व स्थापित दुष्कर्म के मामले में डीएनए जांच रिपोर्ट में किशोर आरोपित जैविक पिता साबित हो गया है. पीड़िता के फर्द बयान पर 12 अक्तूबर, 2009 को सोहसराय थाना कांड संख्या 132/09 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 376 तथा 120बी के तहत मामला दर्ज किया गया था.
आरोपित की जन्मतिथि 22 जुलाई, 1992 है और प्राथमिकी में उम्र 22 वर्ष दर्ज है, परंतु किशोर न्याय परिषद में येन-केन-प्रकारेण अपनी उम्र कम सत्यापित कर मामले की सुनवाई करवा रहा है. आरोपित का पिता प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रहुई में कर्मी है. आरोपित स्वयं भी शिक्षित है. 16 अप्रैल, 2009 को आरोपित अपने भाई के आवास पर बाढ़ गया, जहां भाभी की छोटी बहन भी मौजूद थी, जहां जबर्दस्ती उसके साथ शारीरिक संबंध बनाया. शादी का आश्वासन देकर यह सिलसिला कायम रखा.
इससे पीड़िता गर्भवती हो गयी और दिसंबर, 2009 में एक बच्ची को जन्म दिया. परंतु, आरोपित ने उसके साथ शादी करने से इन्कार कर दिया. कोर्ट द्वारा दबाव बनाने पर डीएनए जांच प्रतिवेदन से वह बच्ची का जैविक पिता साबित हुआ. आज मंगलवार को कोर्ट में पीड़िता पक्ष की अनुपस्थिति में सुनवाई में आरोपित ने भी लगभग स्वीकार कर लिया की रिपोर्ट सही है.
आरोपित को बच्ची को अनाथ छोड़ने के बजाय अब उसकी मां के साथ अपनाना होगा. यदि आरोपित ऐसा नहीं करता है तो विधि अनुसार किशोर न्याय परिषद से तीन वर्ष कारावास तथा सत्र न्यायालय से 10 वर्ष की सजा हो सकती है. पीड़िता को नहीं अपनाने के मामले में उसका परिवार भी आरोप के घेरे में आ सकता है, जबकि बच्ची आरोपित के पैतृक संपत्ति में समान हकदार होगी.
