नियंत्रित बाजार की व्यवस्था से किसानों को लाभ
हरनौत : प्रखंड मुख्यालय स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में प्रभात खबर किसान चौपाल का आयोजन किया गया. जिसमें जिले के विभिन्न प्रखंडों के किसानों ने भाग लिया. इस दौरान किसानों ने अपनी विभिन्न समस्याओं पर विचार विमर्श किया. उपस्थित किसानों ने बताया कि सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण ही किसानों की हालत दयनीय है. हालात यह हो गयी है कि सभी तरह के अनाज की कीमत घटकर दस पंद्रह वर्ष पूर्व वाली हो गयी है, जिसका नतीजा अब किसानों को भी सड़क पर उतरना पड़ता है.
भले ही केंद्र सरकार किसानों की आय दोगुनी करने में लगी हो, लेकिन होगा कुछ नहीं. सरकार सिर्फ स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश ही लागू कर दे, तो किसान की स्थिति सुधर जायेगी. आजादी के बाद से ही हर बार सरकार किसानों के लिए कुछ नया करती है.बावजूद किसानों की हालात में गुणात्मक सुधार नहीं हुआ है.
कृषि विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के कारण उनके द्वारा दी जाने वाली बीज या दवा की गुणवत्ता बेहद ही घटिया है. लिहाजा किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. कृषि क्षेत्र में मजदूरों की कमी से किसानों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ता है. इसके लिए सरकार रियायत कीमत पर नयी तकनीक की मशीन बाजार में उतारे. कम से कम सरकार के द्वारा प्रति पंचायत पैक्स के आधार पर नयी तकनीक का यंत्र मुहैया करायी जाये. किसान क्रेडिट कार्डधारियों को उनके व्यक्तिगत फसल क्षति होने पर भी उनके खातों में ससमय फसल क्षति का मुआवजा राशि भी मिलना चाहिए. हालांकि समेकित कृषि प्रणाली अपनाने से भी किसान अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं.
किसानों के लिए सही बाजार की जरूरत है.जो किसानों के द्वारा उत्पादित अनाजों को कम से कम समर्थन मूल्य पर खरीद सके. इसके लिए सरकार पैक्स के द्वारा खरीद की जा रही धान व गेहूं की तरह ही अन्य अनाजों की खरीद के लिए भी व्यवस्था करे .
सतीश कुमार ,कल्याणबिगहा
सरकार की किसान विरोधी नीति के कारण किसान की हालत दयनीय हो गयी है. जिससे वे कर्ज तले दबे हुए हैं. कृषि क्षेत्र में मजदूरों का अभाव है. इसके लिए सरकार आवश्यकतानुसार कृषि यंत्र मुहैया कराएं,साथ ही सरकार चकबंदी की व्यवस्था करे.
विनीत कुमार,परासी,नूरसराय
किसानों की आर्थिक स्थिति में तभी सुधार होगा जब किसान संगठित होकर क्लब,संगठन या सिंडिकेट बनाकर कार्य करें. किसानों को गुणवत्ता पूर्ण बीज एवं अन्य कृषि दवाओं की भी समस्या बनी रहती है. इसका निदान होना चाहिए.
हरेंद्र कुमार,नगरनौसा सकरपुरा
किसानों को मूलभूत सुविधाओं की कमी ही उनके बढ़ने में सबसे बड़ी रुकावट है. सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी प्रकार के अनुदान में भी काफी घालमेल होता है. जिससे किसानों को आर्थिक क्षति होती है. अच्छा है कि सभी प्रकार के अनुदान कार्यक्रम को बंद कर सिर्फ किसानों के उत्पादन का लाभकारी मूल्य दे दी जाये.
कृष्णा पंडित, नंदाबिगहा,हरनौत
बीते वर्षों में बीज की गुणवत्ता की शिकायत मिली थी. लेकिन इस वर्ष किसानों को गुणवत्ता पूर्ण बीज दिये गये हैं. आगे भी व्यवस्था ठीक रहेगी. किसानों के खाते में दी जाने वाली अनुदान की राशि का तरीका सुगम हो, ताकि उनके खाते में अनुदान की राशि जल्दी पहुंच जाये.
रामदेव राम, प्रखंड कृषि पदाधिकारी,हरनौत
किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सरकार को नियंत्रित बाजार की व्यवस्था करने की जरूरत है.ताकि किसानों को उत्पादन के बाद भी बेचने के समय उचित मूल्य मिल सके.क्योंकि बाजार में खाद बीज आदि की कीमत तय होती है. इसलिए किसानों के उत्पादन की कीमत भी फिक्स होना चाहिए.
डॉ उमेश नारायण उमेश, केवीके(वैज्ञानिक)
