स्वच्छता को लेकर किया जागरूक

बिहारशरीफ : राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान को लेकर गुरुवार को कॉलेज के बीएड विभाग द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया. इस अभियान में भाग लेते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ देवकीनंदन सिंह ने कहा कि स्वच्छता में देवत्व का निवास होता है. मनुष्य होने के नाते हमें अपने शरीर, वस्त्र तथा घर के साथ-साथ आस-पड़ोस, गली-मोहल्लों को […]

बिहारशरीफ : राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान को लेकर गुरुवार को कॉलेज के बीएड विभाग द्वारा स्वच्छता अभियान चलाया गया. इस अभियान में भाग लेते हुए कॉलेज के प्राचार्य डॉ देवकीनंदन सिंह ने कहा कि स्वच्छता में देवत्व का निवास होता है. मनुष्य होने के नाते हमें अपने शरीर, वस्त्र तथा घर के साथ-साथ आस-पड़ोस, गली-मोहल्लों को भी साफ-सुथरा रखना चाहिए. गंदगी से कई प्रकार की बीमारियां भी फैलती है. इसलिए स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए हमें अपने परिवेश को स्वच्छ रखना चाहिए. विशिष्ट अतिथि के रूप में बीएड के को-ऑर्डिनेटर प्रो शैलेंद्र कुमार ने कहा कि स्वस्थ जीवन जीने की कामना हर किसी को होती है. स्वस्थ जीवन जीने के लिए मनुष्य को सबसे पहले, स्वच्छता पर ध्यान देना चाहिए.

गंदगी के बीच उत्तम स्वास्थ्य की कामना नहीं की जा सकती है. समाज के सभी लोगों को स्वच्छता के प्रति सजग रहकर स्वस्थ्ा य जीवन जीना चाहिए. विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव कुमार ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि स्वच्छता हमारे जीवन चरित्र को दर्शाता है. पूरे समाज तथा शहर को स्वच्छ रखने में हमारा सहयोगात्मक रवैया काफी उपयोगी साबित हो सकता है. कॉलेज के छात्र-छात्राओं द्वारा आठ ग्रुप बनाकर कॉलेज परिसर के साथ-साथ आस-पास के सड़कों की साफ-सफाई की गयी. इस मौके पर सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार, डॉ. जयशंकर प्रसाद, अर्पणा कुमारी, पिंकी कुमारी, संगीता कुमारी, उषा कुमारी, कृति स्वराज, प्रशांत, दिलीप कुमार पटेल, डॉ. रंजन कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-शिक्षक मौजूद थे.
दर्जा जरूरी
नालंदा के विकास के लिए प्रखंड नहीं तो नगर पंचायत का दर्जा आवश्यक है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष को विश्व धरोहर का दर्जा मिला है. विरासत के अनुरूप यहां सैलानियों के लिए मौलिक सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए. तभी नालंदा के प्रति आकर्षण बढ़ेगा.
डाॅ श्रीकांत सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर
उपेक्षा का शिकार
देश-दुनिया में नालंदा की अलग पहचान है. लेकिन अब तक यह सरकारी उपेक्षा का शिकार है. यहां पार्किंग की समस्या तो है ही शौचालय तक नहीं है. नगर पंचायत का दर्जा मिलने से इसके चहुंमुखी और बहुमुखी विकास की संभावनाएं हैं. नालंदा को नगर पंचायत का दर्जा मिलना चाहिए .
पंकज कुमार, होटल मैनेजर
क्या कहते हैं अधिकारी
नालंदा को नगर पंचायत का दर्जा देने का प्रस्ताव है. इसके लिए करीब 70 फीसदी शहरी आबादी आवश्यक है. लेकिन नालंदा में शहरी आबादी नहीं रहने के कारण ही कुछ समस्याएं आड़े आ रही हैं.
अलख निरंजन, बीडीओ, सिलाव
विकास नहीं हुआ
विश्व प्रसिद्ध नालंदा को किसी की नजर लग गयी है. आजादी के 70 साल बाद भी इसका विकास 70 कदम आगे नहीं बढ़ सका है. यहां देशी-विदेशी पर्यटक बड़ी संख्या में प्रतिदिन आते हैं. लेकिन उनके लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन विफल है. नालंदा के विकास के लिए नगर पंचायत तो होना ही चाहिए.
अनिल कुमार, समाजसेवी

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