बिहारशरीफ : बहुत दिनों से बदहाली का जीवन बसर करने वाले बुनकरों का दिन एकबार फिर बहुरने लगा है. नालंदा के बुनकरों द्वारा निर्मित सामग्रियों की डिमांड सूबे के विभिन्न हिस्सों में जर्बदस्त रूप से हो रही है.इस तरह नालंदा निर्मित सामग्री सूबे में अपनी अलग पहचान बनायी है. लिहाजा जिले के बुनकरों का नाम तो रौशन हो ही रहा है. साथ ही बुनकरों को अच्छी खासी आमदनी भी हो रही है. नालंदा जिले में बुनकरों के उत्थान के लिए कई योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं. जिले में रेशम वस्त्र की भी अच्छी खासी बुनाई की जा रही है.रेशमी वस्त्रों के निर्माण में नेपुरा व जलालपुर की जिले में अपना एक अलग स्थान है.
यहां के बुनकरों के द्वारा एक से बढ़कर एक रेशमी साड़ियों का निर्माण किया जा रहा है.रेशमी साड़ियों की बिक्री जिले के बाजारों में तो खूब हो ही रही है.अब इसकी मांग जिले ही नहीं बल्कि सूबे के विभिन्न जिलों से भी खूब हो रही है.यहां तक कि केन्द्र व राज्य सरकारों की ओर से लगाये जाने वाले विभिन्न स्टॉलों पर उपस्थिति दर्ज है.इन स्टॉलों पर नेपुरा व जलालपुर में निर्मित साडि़यों की खूब बिक्री हो रही है.इन साड़ियों की अच्छी खासी डिमांड होने से बुनकरों को भी अच्छी आमदनी भी हो रही है.
लिहाजा उनकी माली हालात भी सबल हो रही है.नालंदा के बुनकरों द्वारा निर्मित सतरंगी चादरें भी लोगों को खूब भा रही हैं.जिले के आठ जगहों पर सतरंगी चादरों का निर्माण हो रहा है.रामचंद्रपुर,रहुई,अलीनगर,नेपुरा,झींगनगर,बसवनबिगहा आदि जगहों पर सतरंगी चादर बनायी जा रही हैं.यह चादर सूबे के सभी अस्पतालों के बेडों को भी शोभा बढ़ा रही हैं. सतरंगी चादर निर्माण के लिए सरकार की ओर से बुनकरों को मात्र तीन हजार रुपये में 68 इंज कपड़ा बनाने वाले करघों की सप्लाई की जा रही है. जबकि करघों की वास्तविक कीमत 30 हजार है.इस तरह की मशीन जिले के 500 बुनकरों को देने की सरकार की योजना है.सतरंगी चादरों के निर्माण में कुल 60 बुनकर लगे हुए हैं.जिले के 60 बुनकर परिवार द्वारा सतरंगी चादर का निर्माण किया जा रहा है.सूबे के अस्पतालों में इन चादरों की सप्लाई की जा रही है.रोगियों के बेडों की शोभा बढ़ा रही है.सरकार की इन योजनाओं से जिले के बुनकर लाभांवित हो रहे हैं.बुनकर परिवारों को रोजगार मिल रहा है.घर बैठे ही उन्हें रोजगार मिल जा रहा है.
