बिहार पुलिस: वैशाली महिला थाना की थानाध्यक्ष पूर्णिमा कुमारी को रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई एसडीपीओ सदर-2 लालगंज की जांच रिपोर्ट के आधार पर वैशाली एसपी ने की है. आरोप है कि एक केस के प्राथमिकी अभियुक्त के भाई का नाम मुकदमे से हटाने के बदले एक लाख रुपये की मांग की गयी थी. पूर्णिमा कुमारी इससे पहले मुजफ्फरपुर जिले में भी महिला थानाध्यक्ष के पद पर तैनात रह चुकी हैं.
वायरल ऑडियो के बाद शुरू हुई जांच
मामला वैशाली महिला थाना में दर्ज दहेज प्रतिषेध अधिनियम से जुड़े एक केस के वायरल ऑडियो से सामने आया. जानकारी के अनुसार, ऑडियो क्लिप को तिरहुत क्षेत्र के डीआइजी कार्यालय से 16 सितंबर 2026 को जांच के लिए वैशाली एसपी के पास भेजा गया था. इसके बाद एसडीपीओ सदर-2 लालगंज को मामले की जांच सौंपी गयी.
जांच के दौरान रिकॉर्डेड ऑडियो की तारीख और समय 22 अगस्त 2026 को दोपहर करीब 12:30 से 1:30 बजे के बीच का बताया गया. जांच रिपोर्ट में थानाध्यक्ष पूर्णिमा कुमारी के कथित आचरण को संदिग्ध माना गया है.
नाम हटाने के बदले एक लाख मांगने का आरोप
जांच रिपोर्ट के अनुसार, केस के प्राथमिकी अभियुक्त सिपाही नवलेश कुमार से उसके भाई विमलेश कुमार का नाम मुकदमे से हटाने के एवज में एक लाख रुपये की मांग किये जाने की बात सामने आयी. जांच अधिकारी के अनुसार, उपलब्ध तथ्यों से सदोष लाभ हासिल करने की मंशा पर सवाल उठे.
इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर वैशाली एसपी ने पूर्णिमा कुमारी को निलंबित कर दिया. मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जा रही है.
डीआइजी कार्यालय के रीडर पर आरोप की पुष्टि नहीं
जांच के दौरान महिला थानाध्यक्ष की ओर से डीआइजी कार्यालय के रीडर के साथ किसी लेनदेन से संबंधित कोई मैनुअल या तकनीकी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया. पूछताछ में भी इस संबंध में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला. ऐसे में रीडर पर लगाए गये लेनदेन के आरोप की जांच में पुष्टि नहीं हुई.
मूल ऑडियो की तलाश में पुलिस
इधर, मामले में आरोपी सिपाही नवलेश कुमार ने ऑडियो तैयार करने से इनकार किया है. पुलिस अब वायरल क्लिप के मूल रिकॉर्डिंग स्रोत की तलाश कर रही है. जांच अधिकारी एक न्यूज रिपोर्टर से संपर्क कर मूल ऑडियो हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं, ताकि रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और पूरे मामले से जुड़े तथ्यों की आगे जांच की जा सके.
पूर्णिमा कुमारी के निलंबन के बाद अब पुलिस विभाग की जांच आगे बढ़ रही है. मामले में उपलब्ध ऑडियो, पूछताछ और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जायेगी.
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