Kanti News: कांटी. नगर परिषद के साहित्य भवन में नूतन साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में रविवार को गोस्वामी तुलसीदास जयंती पखवाड़ा मनाया गया. परिषद के अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह चंद्र ने तुलसीदास के चित्र और रामचरितमानस पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस दौरान गोस्वामी तुलसीदास के साहित्य, भारतीय संस्कृति और मानवीय मूल्यों में उनके योगदान पर चर्चा की गयी.
भारतीय संस्कृति और जनमानस के महाकवि हैं तुलसीदास
परिषद अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह चंद्र ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास भारतीय संस्कृति और जनमानस के महाकवि हैं. उन्होंने रामचरितमानस की रचना कर भारतीय समाज को मर्यादा, समन्वय और लोकमंगल का संदेश दिया.
उन्होंने कहा कि सगुण भक्ति के उपासक तुलसीदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, लोकमंगल और मानवीय मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया. उनकी रचनाएं मानव जीवन को सत्य, मर्यादा, करुणा और सदाचार का मार्ग दिखाती हैं.
नई पीढ़ी को तुलसी साहित्य से जोड़ना जरूरी
चंद्रभूषण सिंह चंद्र ने कहा कि नई पीढ़ी को तुलसी साहित्य से जोड़ना समय की आवश्यकता है. तुलसीदास की रचनाओं में लोकजीवन, मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है.
उन्होंने कहा कि तुलसी की रचनाएं केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और साहित्यिक दृष्टिकोण से भी उनका विशेष महत्व है.
तुलसी की भक्ति भावना पर भी हुई चर्चा
चंद्र ने तुलसीदास की भक्ति भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी भक्ति आडंबर से रहित थी. उनकी रचनाओं में विभिन्न संबंधों के आदर्श और कर्तव्यों का संदेश मिलता है.
उन्होंने तुलसीदास के जीवन में पत्नी रत्नावली के वचनों से आए बदलाव का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे तुलसी के भीतर की ऊर्जा और प्रेम सांसारिकता से हटकर ईश्वरीय भक्ति की ओर मुड़ा.
साहित्यकारों ने तुलसीदास को किया नमन
कार्यक्रम के दौरान चंद्रभूषण सिंह चंद्र के साथ स्वराजलाल ठाकुर, परशुराम सिंह, रामेश्वर महतो, सूबेदार नंदकिशोर ठाकुर, महेश कुमार समेत अन्य लोगों ने तुलसीदास के चित्र और रामचरितमानस पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें नमन किया.
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