शिव प्यारे हैं, सुंदर भी हैं, खुशियों के ये सागर भी हैं

शिव प्यारे हैं, सुंदर भी हैं, खुशियों के ये सागर भी हैं

नटवर साहित्य परिषद ने किया कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन

उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर

छोटी सरैयागंज स्थित श्री नवयुवक समिति ट्रस्ट भवन के सभागार में रविवार को नटवर साहित्य परिषद की ओर से मासिक कवि गोष्ठी सह मुशायरा का आयोजन किया गया. अध्यक्षता डाॅ हरिकिशोर प्रसाद सिंह, मंच संचालन सुमन कुमार मिश्र व धन्यवाद ज्ञापन नटवर साहित्य परिषद के संयोजक डॉ नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी ने किया. कवि गोष्ठी की शुरुआत आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री की रचनाओं के पाठ से किया गया. डाॅ नर्मदेश्वर मुजफ्फरपुरी ने आज दहशत है क्यों हवाओं में, आग कैसे लगी फिजाओं में सुनाकर दाद बटोरी. सुमन कुमार मिश्र ने मिले नहीं जो मन आपस में, नजर मिलाना बहुत कठिन है, डाॅ हरीकिशोर प्रसाद सिंह ने गुजरात में जन्म लिये जो भारत मां के लाल सुनाया. सत्येंद्र कुमार सत्येन ने नदिया के पार दे उतार रे मलहा, पार उतरउनी तोहरा देहव सोनवा हार ले मलहा सुनाकर तालियां बटोरी. अरूण कुमार तुलसी ने मधुर मिलन की आस लिए प्यास अभी अधूरी है और ओमप्रकाश गुप्ता ने मर्यादा के प्रतीक राम को मिलता है बनवास यहां सुनाकर दाद ली.

अशोक भारती ने नाम दुनिया में हो रौशन राह कुछ ऐसी चुनो और प्रमोद नारायण मिश्र ने आज कहने दो वर्ना न कह पाएंगे सुनाकर भरपूर दाद बटोरी. सविता राज ने शिव प्यारे हैं , सुंदर भी हैं, खुशियों के ये सागर भी हैं सुना कर श्रोताओं में भक्ति जगायी. डाॅ जगदीश शर्मा ने सुख की खोज में, लगा रहता दिन रात हूं और रामबृक्ष राम चकपुरी ने नश्तर भी लगाए मरहम की तरह, मोहन कुमार सिंह ने आओ सब मिल बम बम बोले और अंजनी कुमार पाठक ने रिमझिम- रिमझिम मेधा बरसे सुनाकर तालियां बटोरी. इसके अलावा मुन्नी चौधरी, ज, सिद्धि मोहन, हिंदलाल, नंदकिशोर पोद्दार व सुरेंद्र कुमार की रचनाएं सराही गयी.

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Author: PRASHANT KUMAR

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