15 लाख की शराब समेत सात तस्कर गिरफ्तार, यूपी से सिवान तक फैला था नेटवर्क

15 लाख की शराब समेत सात तस्कर गिरफ्तार, यूपी से सिवान तक फैला था नेटवर्क

: उत्पाद विभाग की टीम ने रेवा के अंबारा रोड में की कार्रवाई

: पुलिस व बीएसएफ का स्टीकर लगा दो स्कॉर्पियो व पिकअप जब्त

संवाददाता, मुजफ्फरपुर

उत्पाद विभाग ने यूपी से लेकर सिवान तक फैले शराब तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. सरैया के रेवा से अंबारा चौक जाने वाली सड़क से 15 लाख की विदेशी शराब (100 कार्टन) के साथ दो स्कॉर्पियो व एक पिकअप को जब्त किया गया है. इस दौरान सात शराब धंधेबाज को भी दबोचा गया है. इसमें एक स्कॉर्पियो पर बीएसएफ व दूसरे पर पुलिस का स्टीकर लगा हुआ है. पकड़े गए धंधेबाजों की पहचान यूपी के देवरिया जिला के देवरिया थाना के रहने वाले रोहित कुमार, रुद्रपुर थाना के मिश्रौलिया निवासी अखिलेश कुमार, सिवान के मौरवा थाना के कोड़रा वार्ड नंबर चार निवासी शत्रुघ्न कुमार पटेल, सिसवा बुजुर्ग के विकास सिंह, सुमेरपुर के संदीप यादव , धमोड़ वार्ड नंबर 12 के निर्भय कुमार सिंह व दरौली थाना के खापपुनक निवासी आकाश सिंह के रूप में की गयी है. उत्पाद थानेदार इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गयी है. पकड़े गए तस्करों ने पूछताछ के दौरान बताया है कि वे लोग पूर्व में 15 बार यूपी से शराब की खेप लाकर मुजफ्फरपुर, वैशाली व सिवान में सप्लाई दे चुके हैं.

उत्पाद थानेदार ने बताया कि गुप्त सूचना मिली थी कि उत्तर प्रदेश से एक पिकअप वैन में शराब की बड़ी खेप लाई जा रही है. सूचना मिलते उनकी टीम सरैया के रेवा घाट पर पहुंच कर घेराबंदी कर दी. जैसे ही पिकअप वैन मौके पर पहुंची. उसके पीछे-पीछे दो स्कॉर्पियो गाड़ियां भी आईं. टीम ने तीनों गाड़ियों को रोककर तलाशी ली. पिकअप वैन की तलाशी के दौरान पता चला कि उसमें ड्राइवर के केबिन और नीचे एक गुप्त तहखाना बनाया गया था, जिसमें शराब की पेटियां भरी हुई थीं. पूछताछ में पिकअप के चालक ने बताया कि दोनों स्कॉर्पियो गाड़ियां लाइनर का काम कर रही थीं, यानी वे आगे-आगे चलकर पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं.

पुलिस व उत्पाद विभाग को चकमा देने के लिए लगाया था स्टीकर

उत्पाद थाने पर पूछताछ के दौरान गिरफ्तार धंधेबाजों ने बताया है कि वे लोग उत्पाद विभाग व पुलिस टीम को चकमा देने के लिए स्कॉर्पियो पर बीएसएफ व पुलिस का स्टीकर लगाकर चलता था. अगर कहीं किसी चेक पोस्ट पर रोका जाता था तो वे लोग विशेष पुलिस टीम से जुड़े होने की बात कहकर वहां से आसानी से निकल जाते थे.

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Author: PRASHANT KUMAR

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