Muzaffarpur News: नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति मुजफ्फरपुर की 26वीं अर्धवार्षिक बैठक बैंक ऑफ इंडिया के आंचलिक प्रबंधक और नाराकास अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित की गयी. बैठक में गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग के उप निदेशक डॉ. विचित्र सेन मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे. बैठक में सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के साथ डिजिटल माध्यम और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के उपयोग पर जोर दिया गया.
प्रशासनिक दक्षता और जनसंपर्क का माध्यम बने राजभाषा
नाराकास अध्यक्ष शैलेंद्र प्रसाद ने कहा कि राजभाषा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. यह प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के साथ जनसंपर्क का प्रभावी माध्यम बन सकती है. उन्होंने कार्यालयों में सरकारी कामकाज के दौरान हिंदी के अधिक से अधिक प्रयोग पर जोर दिया.
एआई और डिजिटल माध्यमों से खुली नई राह
मुख्य अतिथि डॉ. विचित्र सेन ने कहा कि तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल माध्यमों ने राजभाषा के साथ अन्य भारतीय भाषाओं के लिए भी नई संभावनाएं पैदा की हैं.
उन्होंने कहा कि राजभाषा नीति का उद्देश्य किसी भाषा को दूसरी भाषा से प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि सभी भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाना है. उन्होंने कार्यालयों में तकनीक के बेहतर इस्तेमाल के साथ कर्मचारियों के नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया.
उत्कृष्ट कार्यालयों को राजभाषा शील्ड से किया सम्मानित
वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजभाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सदस्य कार्यालयों को राजभाषा शील्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग की ओर से राजभाषा कार्यान्वयन, अब तक की उपलब्धियों और भावी योजनाओं पर विस्तृत प्रस्तुति दी गयी. बैठक में कार्यालयों में डिजिटल माध्यमों और एआई के उपयोग को बढ़ावा देने तथा कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देने पर भी चर्चा हुई.
कार्यक्रम का संचालन नाराकास सचिव रवि कुमार ने किया. धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन हुआ.
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