बाबा गरीबनाथ मंदिर की तस्वीर
बाबा गरीबनाथ मंदिर
मुजफ्फरपुर के बीचों-बीच स्थित गरीबस्थान मंदिर, बाबा गरीबनाथ धाम के नाम से प्रसिद्ध है. इसे श्रद्धालु बिहार का 'देवघर' भी कहते हैं. सावन के महीने में यहां आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है. लाखों कांवरिया रेवा और पहलेजा घाट से गंगाजल लेकर पैदल यात्रा करते हुए बाबा का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. मान्यता है कि बाबा गरीबनाथ अपने भक्तों की हर सच्ची प्रार्थना सुनते हैं.
भैरव स्थान मंदिर की तस्वीर
औराई स्थित भैरव स्थान
मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड स्थित भैरव स्थान भी सावन में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है. यहां भगवान भैरव के साथ भगवान शिव की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि भैरव स्थान में श्रद्धापूर्वक पूजा करने से नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं. हालांकि, यह धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यता है. ग्रामीण इलाकों में इस मंदिर की विशेष पहचान है. यही वजह है कि सावन के महीने में मुजफ्फरपुर के अलावा सीतामढ़ी और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां बाबा के दर्शन और जलाभिषेक के लिए आते हैं.
दूधनाथ मंदिर की तस्वीर
मुजफ्फरपुर में स्थित बाबा दूधनाथ का मंदिर
मुजफ्फरपुर के छपरा मेघ गांव में स्थित दूधनाथ महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. स्थानीय मान्यता है कि यहां भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करने से अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है और गंभीर बीमारियों से राहत की कामना पूरी होती है. हालांकि, यह पूरी तरह धार्मिक आस्था पर आधारित मान्यता है, जिसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले गांव में खुदाई के दौरान यहां एक शिवलिंग मिला था. बताया जाता है कि जैसे ही कुदाल शिवलिंग से टकराई, वहां से दूध की धारा बहने लगी. इस चमत्कार को देखते हुए लोगों ने इसे भगवान शिव का आशीर्वाद माना और तभी से इस स्थान का नाम 'दूधनाथ धाम' पड़ गया. आज सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
खगेश्वरनाथ मंदिर की तस्वीर
बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर
मुजफ्फरपुर जिले के बंदरा प्रखंड के मतलूपुर गांव में स्थित खगेश्वर नाथ महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है. भगवान शिव को यहां 'पक्षियों के नाथ' यानी खगेश्वर के रूप में पूजा जाता है. सावन के महीने में इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने पर लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और रोजगार व करियर से जुड़ी बाधाएं भी दूर होती हैं. यही वजह है कि सावन में बड़ी संख्या में युवा भी बाबा के दरबार में माथा टेकने आते हैं. हालांकि, यह मान्यता धार्मिक आस्था पर आधारित है. ग्रामीणों के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा हुआ माना जाता है. मंदिर की एक और खास पहचान यहां स्थापित लाल पत्थर के शिवलिंग हैं, जो इसे अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाते हैं.
साहू पोखर मंदिर की तस्वीर
साहू पोखर स्थित शिवालय
मुजफ्फरपुर के साहू पोखर स्थित प्राचीन शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है. वर्षों पुराना यह मंदिर अपनी धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव की नियमित पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं. हालांकि, यह मान्यता धार्मिक आस्था पर आधारित है. सावन के हर सोमवार को इस मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि बाबा गरीबनाथ धाम में जलाभिषेक करने के बाद साहू पोखर स्थित शिव मंदिर में भी पूजा करने की परंपरा है. उनकी मान्यता है कि दोनों स्थानों पर दर्शन और जलाभिषेक करने के बाद ही सावन की पूजा पूर्ण मानी जाती है.
