Paperless Registry: मुजफ्फरपुर17 अगस्त से जिले में पेपरलेस रजिस्ट्री की व्यवस्था लागू हो जायेगी. आम लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए लिया गया यह एक बड़ा और जनहितैषी सरकारी फैसला है. शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुजफ्फरपुर के जिला अवर निबंधक (डीएसआर) अजय कुमार ने बताया कि यह अत्यंत ‘सिटीजन-फ्रेंडली’ सेवा है, जो डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी. दस्तावेज तैयार करने के लिए अब कागज की बिल्कुल आवश्यकता नहीं पड़ेगी. आम लोग घर बैठे ही ऑनलाइन एंट्री करके दस्तावेज तैयार कर सकेंगे. अब दस्तावेज के गुम या खराब होने की चिंता नहीं रहेगी. आम नागरिक कभी भी और कहीं से भी अपने निबंधित दस्तावेज की ‘सर्टिफाइड कॉपी’ (प्रमाणित प्रति) ऑनलाइन निकाल सकेंगे. निबंधन कार्यालय का काम पूरी तरह पेपरलेस होने के बाद रिकॉर्ड मैनेजमेंट काफी आसान और पहले की तुलना में कई गुना अधिक सुरक्षित हो जायेगा. अब रजिस्ट्री प्रक्रिया में पेन और पेपर का इस्तेमाल पूरी तरह बंद हो जायेगा. जमीन के क्रेता, विक्रेता, पहचानकर्ता और गवाह से लेकर रजिस्ट्री कार्यालय के किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को कलम का उपयोग नहीं करना पड़ेगा. सब कुछ ‘डिजिटल सिग्नेचर’ (बायोमेट्रिक/ओटीपी) के जरिए संपन्न होगा.
Online Land Registry: कातिब, वकील और स्टाम्प वेंडर बनेंगे ‘सर्विस प्रोवाइडर’
डीएसआर ने स्पष्ट किया कि कातिब (दस्तावेज लेखक), अधिवक्ता और स्टाम्प वेंडर की भूमिका अब समाप्त नहीं होगी, बल्कि वे अब ‘सेवा प्रदाता’ (सर्विस प्रोवाइडर) के रूप में काम करेंगे. विभाग की ओर से उनके पुराने लाइसेंस को ‘सेवा प्रदाता’ के रूप में नवीनीकृत किया जायेगा. वहीं, दूसरे चरण (सेकेंड फेज) में नए युवाओं और लोगों को भी सर्विस प्रोवाइडर बनने का मौका दिया जायेगा.
पहले चरण की सफलता के बाद विस्तार
डीएसआर अजय कुमार ने बताया कि प्रथम चरण में बिहार के 50 निबंधन कार्यालयों में मॉडल के तौर पर इसकी सफल शुरुआत की गयी थी. इसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब 17 अगस्त से राज्य के शेष बचे सभी 91 रजिस्ट्री कार्यालयों में इस डिजिटल व्यवस्था को पूरी तरह लागू किया जा रहा है. यह आम जनता के हित में सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय है.
