Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर. नगर निगम की लचर और ढुलमुल प्रशासनिक नीति के कारण शहर की कई विकास योजनाओं की रफ्तार प्रभावित हो रही है. सड़क, नाला, जलापूर्ति और जल-जीवन हरियाली जैसी योजनाओं का एग्रीमेंट कराने के बाद कई संवेदक अधूरा काम छोड़कर गायब हैं. स्थिति यह है कि विकास कार्य पूरा कराने के लिए निगम के अधिकारी और इंजीनियर जब ठेकेदारों से संपर्क करते हैं, तो कई संवेदक उनका फोन तक नहीं उठाते. इससे स्थानीय स्तर पर निगम प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं.
अधूरा काम छोड़ गायब संवेदक
शहर में कई जगहों पर विकास योजनाओं का काम आधा-अधूरा पड़ा है. एग्रीमेंट के बाद काम शुरू करने वाले संवेदकों ने कई योजनाओं को पूरा किए बिना ही काम बंद कर दिया है.
स्थानीय वार्ड पार्षदों के दबाव के बाद निगम के अधिकारी और इंजीनियर संवेदकों से संपर्क कर काम पूरा करने की हिदायत देते हैं. लेकिन आरोप है कि कई संवेदक अधिकारियों के फोन तक नहीं उठा रहे हैं.
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी मनमानी
संवेदकों के इस रवैये के बावजूद निगम स्तर से उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. पार्षदों का आरोप है कि कार्रवाई में देरी के कारण ठेकेदारों का मनोबल बढ़ रहा है.
शहर की कई महत्वपूर्ण योजनाएं अधूरी रहने से आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
वार्ड 23 और 31 के पार्षदों ने उठाए सवाल
सोमवार को वार्ड नंबर 23 और 31 के पार्षदों ने नगर निगम की कार्यशैली पर तीखा आक्रोश जताया. पार्षदों का कहना है कि संवेदकों पर निगम अभियंताओं की पकड़ कमजोर हो गयी है.
उनका आरोप है कि निगम की इसी ढिलाई के कारण शहर में कई निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं और जनता को आधी-अधूरी सुविधाओं के बीच रहना पड़ रहा है.
जवाबदेही तय करने की मांग
पार्षदों ने अधूरे विकास कार्यों को जल्द पूरा कराने और लापरवाही बरतने वाले संवेदकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. साथ ही उन्होंने निगम की कार्यप्रणाली में सुधार और योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने की जरूरत बतायी.
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