मुजफ्फरपुर के औराई से फिरोज अख्तर की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी को जोड़ने वाले एनएच 22 पर स्थित कटौझा पुल पर भारी संकट मंडरा रहा है. बागमती नदी के तटबंध के भीतर बेखौफ चल रहे अवैध बालू और मिट्टी खनन के खेल ने इस महत्वपूर्ण पुल को जर्जर बना दिया है. खनन माफिया इतने बेखौफ हैं कि वे पुल के पायों के बिल्कुल नजदीक तक पोकलेन और जेसीबी मशीनों से खुदाई कर रहे हैं. अगर यह पुल क्षतिग्रस्त होता है, तो मुजफ्फरपुर से सीतामढ़ी का संपर्क पूरी तरह कट जाएगा.
दिन-रात चल रही हैं पोकलेन और जेसीबी मशीनें
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कटौझा सेतु के पास दर्जनों डंपर, पोकलेन और जेसीबी मशीनें दिन-रात अवैध खनन में जुटी रहती हैं. हालांकि, शुक्रवार को बागमती नदी के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि के कारण खनन माफिया अस्थायी रूप से अपनी गाड़ियां और मशीनें समेटकर भाग खड़े हुए हैं और पानी कम होने का इंतजार कर रहे हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि इस एनएच मार्ग से रोजाना शासन-प्रशासन के बड़े अधिकारी गुजरते हैं, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.
नेपाल सीमा तक बेची जा रही मिट्टी, नदी के पायों के पास बना दी सड़क
खनन का यह कारोबार सिर्फ नदी के किनारों तक सीमित नहीं है. बांध मरम्मत और सड़क निर्माण की आड़ में मिट्टी की कटाई कर इसे नेपाल की सीमा तक सरेआम बेचा जा रहा है. माफियाओं ने बागमती नदी के बीच वाले पाये (पिलर) के बेहद करीब तक अवैध खुदाई कर दी है और गाड़ियों के आर-पार जाने के लिए नदी के बीचों-बीच रास्ता तक बना लिया है. इस सिंडिकेट में मुजफ्फरपुर और सीतामढ़ी के कई बड़े खनन माफिया सक्रिय हैं. पुल के पूर्वी, दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों के साथ-साथ बेनीपुर स्थित रेलवे पुल के पास भी सैकड़ों ट्रैक्टरों के जरिए यह अवैध खेल जारी है.
तटबंध जर्जर, कई गांव पर मंडराया बाढ़ का बड़ा खतरा
इस अंधाधुंध अवैध खनन के कारण बेनीपुर, महुआरा, अतरार और भरथुआ जैसे गांवों में बाढ़ के समय तटबंध टूटने का खतरा बेहद बढ़ गया है. लगातार हो रही खुदाई की वजह से नदी की कई उप-धाराएं बन चुकी हैं, जो अब मुख्य बांध के समानांतर बह रही हैं. इससे इलाके की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ जमीन बंजर हो चुकी है. भारी-भरकम डंपरों और ट्रैक्टरों के दिन-रात दौड़ने से तटबंध कई जगहों पर बुरी तरह जर्जर हो चुके हैं, जिन्हें बचाने के लिए फिलहाल मरम्मती का काम किया जा रहा है. बागमती का यह कीमती बालू और मिट्टी मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी से लेकर दरभंगा तक धड़ल्ले से सप्लाई किया जा रहा है.
