मुजफ्फरपुर से देवेश कुमार की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: शहरी क्षेत्रों में हर घर नल-जल योजना की रफ्तार बेहद सुस्त है. स्थिति यह है कि शहर से लेकर नवगठित नगर पंचायतों तक में हजारों परिवार आज भी शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से महरूम हैं. विभागीय सुस्ती और लालफीताशाही के कारण कई महत्वपूर्ण योजनाएं पिछले काफी दिनों से केवल टेंडर की फाइलों में ही हिचकोले खा रही हैं.
सरकारी दावों की खुली पोल, 7075 घरों में अब तक नल-जल नहीं
सरकारी दावों के उलट जमीनी आंकड़े बताते हैं कि नगर निगम से लेकर विभिन्न नगर परिषदों और नगर पंचायतों के कुल 7,075 घरों में अब तक नल-जल योजना की शुरुआत नहीं हो सकी है.
टेंडर के फेर में अटकीं महत्वपूर्ण योजनाएं
स्थानीय स्तर पर विभागीय उदासीनता के कारण जलापूर्ति योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं. कई प्रभावित इलाकों में पाइपलाइन बिछाने और जलापूर्ति शुरू करने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया तो शुरू की गई, लेकिन फाइलें टेंडर के स्तर पर आकर अटक गईं. जब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी होकर धरातल पर काम शुरू नहीं होता, तब तक इन सात हजार से अधिक परिवारों को नल के जल के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा.
जानिए आपके शहरी निकाय में कितने घर हैं नल-जल से वंचित
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरपुर नगर निगम क्षेत्र के ही 2090 घरों में अब तक पानी नहीं पहुंचा है. इसके अलावा नवगठित और पुराने शहरी निकायों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है, जो इस प्रकार है:
- कुढ़नी नगर पंचायत: 2600 घर
- मीनापुर नगर पंचायत: 890 घर
- माधोपुर सुस्ता नगर पंचायत: 650 घर
- कांटी नगर परिषद: 569 घर
- मुरौल नगर पंचायत: 470 घर
- सकरा नगर पंचायत: 389 घर
- साहेबगंज नगर परिषद: 227 घर
- सरैया नगर पंचायत: 200 घर
शहरी इलाकों की यह बदहाली साफ बयां करती है कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है.
