मुजफ्फरपुर से कुमार गौरव की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: उत्तर बिहार में भीषण गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की खपत में अप्रत्याशित इजाफा हुआ है. इस बढ़ते लोड का सीधा असर अब बिजली विभाग के बुनियादी ढांचे पर दिखने लगा है. पिछले करीब एक सप्ताह के भीतर मुजफ्फरपुर शहर और उससे सटे ग्रामीण इलाकों में ओवरलोडिंग के कारण करीब एक दर्जन ट्रांसफॉर्मर जल चुके हैं. इसके कारण संबंधित मोहल्लों के हजारों उपभोक्ताओं को भीषण गर्मी में गंभीर बिजली संकट का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, बिजली विभाग ने दावा किया है कि शहरी क्षेत्रों में जले हुए सभी ट्रांसफॉर्मरों को 24 घंटे के भीतर बदल दिया गया है.
200 केवी के ट्रांसफॉर्मर जले, जगह की कमी से नई मशीनें लगाने में बाधा
विभागीय जानकारी के अनुसार, शहर के भीतर अलग-अलग जगहों पर 200 केवी क्षमता के पांच ट्रांसफॉर्मर जल गए थे, जिनकी जगह अब अधिक क्षमता वाले नए ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं. शहरी वन डिवीजन के कार्यपालक अभियंता विजय कुमार ने बताया कि ट्रांसफॉर्मर जलने की सूचना मिलते ही उसे शीघ्र बदलने की कार्रवाई की जाती है. जब तक नया ट्रांसफॉर्मर नहीं लगता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रोटेशन के आधार पर दूसरे ट्रांसफॉर्मर से बिजली दी जाती है. उन्होंने स्वीकार किया कि कई घनी आबादी वाले इलाकों में लोड कम करने के लिए अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर लगाने की जरूरत है, लेकिन पर्याप्त जगह नहीं मिलने से परेशानी हो रही है.
सिकंदरपुर, बालूघाट और अखाड़ाघाट में हाहाकार, अफसर नहीं उठा रहे फोन
जंक्शन से सटे सिकंदरपुर, बालूघाट और अखाड़ाघाट इलाके के उपभोक्ता पिछले कई दिनों से सबसे ज्यादा परेशान हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर घंटे बिजली कट रही है. खासकर शाम पांच बजे से सुबह सात बजे तक स्थिति नारकीय हो जाती है. शाम को लोड बढ़ते ही महज 5 से 15 मिनट बिजली रहती है और फिर अगले 45 मिनट के लिए गायब हो जाती है. उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि शिकायत के लिए फोन करने पर संबंधित जेई कॉल तक नहीं उठाते हैं. वहीं, पावर सब स्टेशन (PSS) में संपर्क करने पर हर बार फॉल्ट होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है.
