Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल: बनकर तैयार है नया ICU, फिर भी नहीं मिल रहा इलाज

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में करोड़ों की लागत से बना 30 बेड का अत्याधुनिक आईसीयू साल भर से बंद है. डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीज निजी अस्पतालों में महंगे इलाज के लिए मजबूर हैं.पढे़ं पूरी खबर…

मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट

Muzaffarpur News: उत्तर बिहार के सबसे बड़े अस्पताल, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (एसकेएमसीएच) से लापरवाही की एक बड़ी तस्वीर सामने आई है. अस्पताल में गंभीर मरीजों की जान बचाने के उद्देश्य से बना एक अत्याधुनिक आईसीयू पिछले एक साल से बंद पड़ा है. अस्पताल की तीसरी मंजिल पर करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हुआ 30 बेड का यह हाई-टेक आईसीयू वार्ड फिलहाल धूल फांक रहा है. आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस होने के बावजूद इस वार्ड का ताला सिर्फ इसलिए नहीं खुल सका है क्योंकि स्वास्थ्य विभाग इसके संचालन के लिए जरूरी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था करने में नाकाम रहा है. इसके साथ ही मरीजों को तीसरी मंजिल तक पहुंचाने के लिए अब तक लिफ्ट की सुविधा भी शुरू नहीं की जा सकी है.

करोड़ों का प्रोजेक्ट तैयार, लेकिन मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ

इस हाई-टेक आईसीयू वार्ड का निर्माण साल 2023 में बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMSICL) द्वारा शुरू कराया गया था. बीएमआईसीएल ने एक साल पहले यानी 2025 में ही इसका निर्माण कार्य पूरा कर इसे अस्पताल प्रबंधन को सौंप दिया था. इसका मुख्य उद्देश्य मुजफ्फरपुर सहित आसपास के कई जिलों से आने वाले गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज देना था, ताकि उन्हें निजी अस्पतालों के महंगे खर्च से बचाया जा सके. लेकिन हकीकत यह है कि एक साल बीत जाने के बाद भी यह वार्ड आम जनता के लिए पूरी तरह अनुपयोगी साबित हो रहा है.

स्टाफ की कमी से लाचार अस्पताल प्रशासन, कई बार किया पत्राचार

एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. महेश कुमार ने अपनी लाचारी व्यक्त करते हुए बताया कि बिना पर्याप्त डॉक्टरों, तकनीशियनों और नर्सिंग स्टाफ के इतने बड़े और संवेदनशील वार्ड को संचालित करना पूरी तरह असंभव है. उन्होंने कहा, “हमने नये आईसीयू वार्ड के संचालन के लिए आवश्यक मानव बल की मांग को लेकर विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार पत्राचार किया है. जैसे ही विभाग द्वारा स्टाफ की नियुक्ति या प्रतिनियुक्ति की जाएगी, इस वार्ड को तुरंत मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा.

मरीजों पर दोहरी मार, निजी अस्पताल या पटना रेफर होने की मजबूरी

एसकेएमसीएच में हर दिन हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिनमें से कई की स्थिति बेहद गंभीर होती है. अस्पताल में वर्तमान में मौजूद आईसीयू बेड हमेशा फुल रहते हैं. इसके कारण गरीब मरीजों को या तो भारी खर्च उठाकर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है या फिर उन्हें पटना रेफर कर दिया जाता है. कई बार तो समय पर आईसीयू बेड न मिलने के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. ऐसे में साल भर से तैयार यह 30 बेड का वार्ड अस्पताल की व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है.

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Published by: SUMIT KUMAR

सुमित पत्रकारिता में पिछले 4 वर्षों से सक्रिय। प्रभात खबर के प्रिंट मीडिया के साथ काम करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम से जुड़े हुए हैं। क्राइम, हाईपरलोकल, स्वास्थ्य विभाग व राजनीतिक रिपोर्टिंग में विशेष रुचि और अनुभव रखते हैं। क्षेत्रीय मुद्दों और जनसरोकार की खबरों को सशक्त तरीके से उठाने के लिए जाने जाते हैं।

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