मुजफ्फरपुर: मॉडल अस्पताल पहली बारिश में ही जलमग्न, चमचमाती बिल्डिंग के भीतर अव्यवस्था का अंबार

Muzaffarpur News: मुजफ्फरपुर के 29 करोड़ के मॉडल अस्पताल के ओटी में पानी भरने से 7 दिन से ठप ऑपरेशन बुधवार से होंगे शुरू. अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार ने BMSICL को पत्र लिखकर निर्माण गुणवत्ता पर उठाए सवाल. जानिए खबर विस्तार से…

Muzaffarpur News: सदर अस्पताल परिसर में स्थित सूबे के चर्चित भव्य मॉडल अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर (OT) में जलभराव के बाद पिछले एक हफ्ते से ठप पड़ा सर्जरी कार्य बुधवार (3 जून 2026) से दोबारा शुरू होने जा रहा है. मानसून की पहली सामान्य बारिश में ही अत्याधुनिक ओटी के जलमग्न हो जाने के कारण संक्रमण (Infection) के खतरे को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने पिछले सात दिनों से सभी प्रकार के ऑपरेशनों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.मंगलवार को अस्पताल प्रबंधन ने राहत की सांस लेते हुए पूरे ओटी परिसर की विशेष केमिकल से साफ-सफाई कराई.

महज एक साल पहले हुआ था उद्घाटन

इस भव्य मॉडल अस्पताल की बदहाली ने स्वास्थ्य विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी है. स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने बताया कि करीब 29 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार इस तीन मंजिला आलीशान मॉडल अस्पताल का उद्घाटन पिछले साल ही 14 मई 2025 को बड़े जोर-शोर और प्रशासनिक तामझाम के साथ किया गया था.

खुली निर्माण की पोल

उद्घाटन के महज एक साल के भीतर ही सामान्य दर्जे की बारिश होते ही अस्पताल का सबसे संवेदनशील हिस्सा यानी ‘ऑपरेशन थिएटर’ टापू में तब्दील हो गया. छत से पानी टपकने और ड्रेनेज सिस्टम के चोक होने से कीमती सर्जिकल मशीनें और बिजली के बोर्ड पानी की चपेट में आ गए. संक्रमण फैलने और शॉर्ट सर्किट से बड़ा हादसा होने की आशंका को देखते हुए डॉक्टरों को आनन-फानन में चल रहे ऑपरेशनों को बीच में ही रोकना पड़ा था.

बाल्टी और वाइपर के भरोसे सूखा ओटी

ओटी में पानी भरने के बाद पिछले सात दिनों से अस्पताल प्रबंधन में अफरा-तफरी का माहौल था. आनन-फानन में सफाई कर्मियों की एक विशेष टास्क फोर्स को काम पर लगाया गया. कंक्रीट की दीवारों और छत से टपकते पानी के बीच कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद बाल्टियों, वाइपर और वैक्यूम मशीनों के सहारे ओटी के भीतर जमा गंदे पानी को बाहर निकाला.

दूर-दराज से आए मरीज रहे परेशान

इस घोर अव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के कारण उत्तर बिहार के दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से मोतियाबिंद, हाइड्रोसील और प्रसव (सिजेरियन) के लिए आए दर्जनों गरीब मरीजों और उनके परिजनों को भारी मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. कई मरीजों की तारीखें आगे बढ़ा दी गईं, जिससे उन्हें बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ा या निजी नर्सिंग होम का रुख करना पड़ा.

गुणवत्ता पर उठाए सवाल

मामले की गंभीरता और चौतरफा हो रही फजीहत को देखते हुए अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने निर्माण कार्य की तकनीकी खामियों को उजागर करते हुए ‘बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड’ (BMSICL) के प्रबंध निदेशक को एक आधिकारिक और शिकायत पत्र भेजा है.

अस्पताल प्रबंधक ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि महज एक साल पुराने भवन की छत का टपकना और जलभराव होना सीधे तौर पर निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता (Quality) और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है. उन्होंने बीएमएसआइसीएल के इंजीनियरों से तुरंत ड्रेनेज सिस्टम को री-डिजाइन करने और छत की वाटरप्रूफिंग मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में होने वाली भारी बारिश के दौरान मरीजों की जान जोखिम में न पड़े.

मुजफ्फरपुर से कुमार दीपू की रिपोर्ट

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Published by: Purushottam Kumar

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