मुजफ्फरपुर से विनय की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: जिले के मत्स्य पालकों के लिए पारंपरिक मछली पालन अब पुरानी बात होने जा रही है. अब तालाब की सेहत और बेहतर मत्स्य पालन के लिए किसानों को परेशान नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि उनका स्मार्टफोन ही तालाब का डॉक्टर बनेगा. मत्स्य पालन विभाग एक ऐसी आधुनिक तकनीक पर काम कर रहा है, जिसके तहत तालाब में विशेष सेंसर लगाए जाएंगे. यह सेंसर सीधे तौर पर किसानों के मोबाइल ऐप से जुड़ा होगा. इस तकनीक से न सिर्फ लागत घटेगी, बल्कि उत्पादन बढ़ने से किसानों का मुनाफा भी दोगुना हो जाएगा.
तालाब में लगेगा सेंसर, पानी में ऑक्सीजन और अमोनिया का स्तर बताएगा यंत्र
अक्सर तालाब में ऑक्सीजन की कमी या अमोनिया की मात्रा बढ़ने से मछलियां अचानक मरने लगती हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान होता है. यह नई तकनीक इस समस्या को जड़ से समाप्त कर देगी. तालाब के पानी में लगने वाला विशेष सेंसर डिवाइस चौबीसों घंटे सक्रिय रहेगा. जैसे ही पानी में ऑक्सीजन का स्तर कम होगा या अमोनिया और पीएच (pH) मान खतरनाक स्तर पर पहुंचेगा, सेंसर इसे भांपकर मोबाइल ऐप पर तुरंत अलर्ट भेज देगा. यह ऐप मछलियों को दाना देने का सही समय भी बताएगा. आधुनिक सेटअप में यह यंत्र एरिएटर मशीन से जुड़ा होगा, जिसे ऑक्सीजन कम होने पर मोबाइल से ही चालू किया जा सकेगा.
जीविका दीदियां और चयनित प्रगतिशील किसान ले रहे प्रशिक्षण
मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मत्स्य निदेशालय, डेयरी, मत्स्य व पशु संसाधन विभाग, बिहार एक्वाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम सहित ‘प्रदान’ संस्था के सहयोग से जीविका दीदियों और किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. जिले के छह चयनित किसान, जिनमें कांटी के मो. ताज व संदेश कुमार, मड़वन के धर्मेंद्र कुमार व संतोष कुमार, सरैया के आदित्य सहनी और मोतीपुर की रूबी कुमारी शामिल हैं, इस नई विधि से मत्स्य पालन की तैयारी में जुट गए हैं. जिला मत्स्य पदाधिकारी रंधीर कुमार ने बताया कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है.
