मुजफ्फरपुर से कुमार गौरव की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: बिहार में लगातार गिर रहे भूजल स्तर को सुधारने और “जल-जीवन-हरियाली” अभियान को मजबूती देने के लिए पंचायती राज विभाग सख्त कदम उठा रहा है. विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य में बनने वाले सभी पंचायत भवनों में वर्षा जल संचयन यानी रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य होगा. इसके बिना किसी भी नए भवन निर्माण प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलेगी.
नए पंचायत भवनों के लिए सख्त नियम
पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव मिहिर कुमार सिंह सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हैं कि पंचायत सरकार भवन और जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण प्राक्कलन में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अनिवार्य रूप से शामिल की जाए. विभाग साफ करता है कि जिस परियोजना में यह प्रावधान नहीं होगा, उसे प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी जाएगी.
पुराने भवनों में भी बनेगी व्यवस्था
विभाग उन पंचायत भवनों को भी चिन्हित कर रहा है, जहां अभी तक वर्षा जल संचयन प्रणाली नहीं लगी है. ऐसे भवनों को जीपीडीपी, बीपीडीपी और जेडपीडीपी योजनाओं के तहत शामिल कर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचना विकसित की जाएगी.
ऑनलाइन होगी हर भवन की निगरानी
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार सभी जिलों को निर्देश देते हैं कि पंचायत सरकार भवनों और जिला पंचायत संसाधन केंद्रों में बनने वाली रूफटॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं की जानकारी जल-जीवन-हरियाली पोर्टल पर दर्ज की जाए। इसके लिए सभी भवनों की मैपिंग भी अनिवार्य की गई है.
चार साल में 8,092 भवनों का लक्ष्य
विभाग अगले चार वर्षों में राज्य के 8,092 भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित करने की योजना पर काम कर रहा है. वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 700 भवनों में यह व्यवस्था विकसित करने का जिलावार लक्ष्य निर्धारित किया गया है. विभाग का मानना है कि इससे भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और जल संकट से निपटने में मदद मिलेगी.
