औने-पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर किसान, गांव से लेकर मंडी तक बिछा है बिचौलियों का जाल

मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी स्तर पर धान की खरीद शुरू नहीं होने से किसान औने-पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर हो रहे है. किसानों का मुनाफा बिचौलियां गटक रहे है. गांव से लेकर बाजार समिति मंडी तक बिचौलियों का जाल बिछा हुआ है.

मुजफ्फरपुर जिले में सरकारी स्तर पर धान की खरीद शुरू नहीं होने से किसान औने-पौने दाम पर धान बेचने को मजबूर हो रहे है. किसानों का मुनाफा बिचौलियां गटक रहे है. गांव से लेकर बाजार समिति मंडी तक बिचौलियों का जाल बिछा हुआ है.

किसान मजबूरी में घाटा सह रहे

किसानों को किस तरह चपत लगाया जा रहा है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1868 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सरकारी रेट तय होने के बाद भी किसान मजबूरी में घाटा सह रहे है.

किसान महज 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल ही धान को बेच रहे

किसान महज 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल ही धान को बेच रहे है. यही नहीं धान में नमी बता कर भी बिचौलिया किसानों का शोषण कर रहे है. बिना पूंजी के ही बिचौलिया अच्छी खासी आमदनी कर रहे है. बिचौलिया किसानों से 11 सौ रुपये प्रति क्विंटल धान खरीद रहे है. फिर बाजार समिति और राइस मिल में बिचौलिया भी व्यापारी के गोदाम में 1160 से 1170 रुपये प्रति क्विंटल बेच देते है.

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बिचौलिया अपनी पूंजी लगा कर करते हैं खेल

व्यापारी और राइस मिल मालिक बिचौलिया को गांव से धान खरीद के लिए पूंजी तक उपलब्ध कराता है. कुछ बिचौलिया अपनी पूंजी लगा कर धान की खरीद करते है. फिर 60 से 70 रुपये प्रति क्विंटल आमदनी भी कर लेते है.

हर दिन पंजाब, हरियाणा जाती है 55 से 60 गाड़ियां

बाजार समिति में तीन जगहों पर धान खरीद होती है. यहां से पंजाब, हरियाणा, नेपाल के लिए बड़े-बड़े ट्रक पर धान लाद कर भेजी जाती है. एक 22 चक्का ट्रक पर करीब 40 टन धान लोड होता है.

Posted by: Thakur Shaktilochan

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By Prabhat Khabar News Desk

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