मुजफ्फरपुर से प्रभात कुमार की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: करीब 23 साल पुराने एक आर्म्स एक्ट के मामले में न्याय की गाड़ी गवाहों की बेरुखी के कारण थमी हुई है. इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि गवाही देने से बचने वाले कोई आम लोग नहीं, बल्कि खुद कानून के रखवाले हैं. काजीमोहम्मदपुर थाना क्षेत्र से जुड़े इस पुराने मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत नौ पुलिसकर्मी बार-बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे हैं. अब इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सहायक अभियोजक (एपीपी) ने जिलाधिकारी (डीएम) व वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को लिखित रिपोर्ट भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है.
वर्ष 2003 से लंबित है मामला, 12 में से सिर्फ 3 की हुई गवाही
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब काजीमोहम्मदपुर थाना पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार (आर्म्स) जब्त किए थे. इस संबंध में थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. इस पूरे मामले में अभियोजन की ओर से कुल 12 पुलिसकर्मियों को गवाह बनाया गया था. लेकिन दर्जनों समन और नोटिस के बाद भी अब तक केवल 3 पुलिसकर्मियों की ही गवाही पूरी हो सकी है. शेष 9 पुलिसकर्मी लगातार कोर्ट से अनुपस्थित चल रहे हैं, जिसके कारण मामले का ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा है.
अभियोजन कार्यालय की नोटिस को भी कर रहे दरकिनार
सहायक अभियोजक ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि अभियोजन कार्यालय की ओर से इन सभी पुलिस गवाहों को कई बार आधिकारिक नोटिस और समन भेजा जा चुका है. इसके बावजूद कोर्ट के आदेशों की अवहेलना की जा रही है. इसे देखते हुए एपीपी ने डीएम और एसएसपी से अनुरोध किया है कि वे अपने स्तर से इन पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों को कोर्ट में उपस्थित होकर गवाही देने के लिए कड़ाई से निर्देशित करें.
गवाही न देने वाले पुलिसकर्मियों की सूची
कोर्ट से नदारद रहने वाले इन 9 गवाहों में कई ऐसे अधिकारी शामिल हैं, जो अब अलग-अलग थानों या जिलों में तैनात हैं. इनमें तत्कालीन थानाध्यक्ष (काजीमोहम्मदपुर) एन.के. सिंह, तत्कालीन थानाध्यक्ष (गायघाट) एस.एन. मिश्रा, अवर निरीक्षक सह अनुसंधानक सुशील कुमार, सहायक अवर निरीक्षक एन.आर. मिश्र, सहायक अवर निरीक्षक एन.पी. सिंह और आरक्षी गोपाल शर्मा, सुरेश कुमार, संजय कुमार सिंह व उमेश कुमार सिंह शामिल हैं.
