मुजफ्फरपुर न्यूज: पूर्व मध्य रेलवे में ट्रेन परिचालन की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के लिए मुजफ्फरपुर-मोतिहारी रेलखंड के कपरपुरा समेत कई प्रमुख स्टेशनों का विशेष आंतरिक सुरक्षा ऑडिट किया गया. इस दौरान सिग्नलिंग सिस्टम, परिचालन नियमों के पालन और सुरक्षा से जुड़े तकनीकी दस्तावेजों की बिंदुवार जांच की गयी. अधिकारियों ने स्टेशन पर मौजूद सुरक्षा इंतजामों का भी जायजा लिया.
सिग्नलिंग सिस्टम और रिकॉर्ड की जांच
रेलवे मुख्यालय के निर्देश पर अगस्त में विभिन्न मंडलों के चयनित स्टेशनों पर सुरक्षा ऑडिट कराया जा रहा है. कपरपुरा स्टेशन पर अधिकारियों ने सिग्नलिंग व्यवस्था के साथ-साथ रख-रखाव से जुड़े दस्तावेज, तकनीकी रिकॉर्ड और परिचालन से संबंधित अभिलेखों की जांच की.
ऑडिट का मुख्य उद्देश्य यह देखना था कि स्टेशन पर सुरक्षा से जुड़े निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन सही तरीके से किया जा रहा है या नहीं. तकनीकी व्यवस्था में किसी तरह की कमी मिलने पर उसे दूर करने के निर्देश भी दिए गये.
पांच स्टेशनों को किया गया चिह्नित
अगस्त महीने में होने वाले इस विशेष सुरक्षा ऑडिट के लिए समस्तीपुर मंडल के कपरपुरा के अलावा पूर्व मध्य रेलवे के अलग-अलग मंडलों के चार अन्य स्टेशनों को भी चिह्नित किया गया था. इनमें दानापुर मंडल का पटना, डीडीयू मंडल का डीडीयू जंक्शन आरआरआइ, धनबाद मंडल का मेसरा और सोनपुर मंडल का बरागोपाल स्टेशन शामिल है.
इन स्टेशनों पर भी सिग्नलिंग, ट्रेन परिचालन और सुरक्षा मानकों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है.
एसएंडटी और ट्रैफिक अधिकारियों ने लिया जायजा
कपरपुरा में सुरक्षा ऑडिट के दौरान सेफ्टी ऑफिसर चंद्रशेखर कुमार के साथ सिग्नल एवं टेलीकम्युनिकेशन (एसएंडटी) और ट्रैफिक विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद रहे. टीम ने सुरक्षा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जांच करने के साथ संबंधित कर्मियों से भी जानकारी ली.
अधिकारियों ने स्टेशन पर उपलब्ध सुरक्षा इंतजामों को दुरुस्त रखने और परिचालन के दौरान निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया.
तकनीकी खामी दूर करना मुख्य उद्देश्य
रेलवे प्रशासन के अनुसार, ट्रेन परिचालन में सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर स्टेशनों और परिचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं का आंतरिक सुरक्षा ऑडिट किया जाता है. इसका उद्देश्य संभावित तकनीकी खामियों और प्रक्रियागत कमियों की पहचान कर समय रहते उन्हें दूर करना है, ताकि ट्रेनों का परिचालन सुरक्षित तरीके से जारी रहे.
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