मुजफ्फरपुर से मुख्य संवाददाता प्रभात कुमार की रिपोर्ट
Marine Drive Water Pollution: शहर के ऐतिहासिक सिकंदरपुर मन (झील) में इन दिनों जलीय जीवों पर काल मंडरा रहा है. अत्यधिक गर्मी और तापमान में बेतहाशा वृद्धि के कारण मन का पानी खौलने जैसी स्थिति में पहुंच गया है. इसके साथ ही शहर के बड़े नालों का जहरीला और गंदा पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे मन में गिरने से यहां का पानी पूरी तरह सड़ चुका है. स्थिति यह है कि पानी में ऑक्सीजन का स्तर न्यूनतम हो गया है, जिससे तड़प-तड़प कर मछलियां दम तोड़ रही हैं. इससे पहले अप्रैल महीने में भी काफी संख्या में मछलियां मरी थीं, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया.
तटों पर लगा मरे हुए जलीय जीवों का अंबार
सिकंदरपुर मन के किनारे और पानी की सतह पर मरे हुए रेहू, कतला और अन्य प्रजातियों की मछलियों का अंबार देखा जा रहा है. स्थानीय मछुआरों और आस-पास के निवासियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से लगातार हजारों मछलियां मरकर पानी के ऊपर तैर रही हैं. इस जल त्रासदी के कारण स्थानीय मत्स्य पालकों को लाखों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है. मछुआरों की आजीविका पर सीधे तौर पर संकट गहरा गया है और उनकी साल भर की पूंजी पानी में बह गई है. इसी बीच, स्थानीय लोगों ने एक और चिंताजनक बात सामने रखी है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा इन्हीं मरी हुई मछलियों को गुपचुप तरीके से बाजार में बेचा भी जा रहा है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है.
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सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावों के बीच घुट रहा जलीय जीवन
एक तरफ जहां स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सिकंदरपुर मन को ‘मरीन ड्राइव’ की तर्ज पर विकसित करने और इसके सौंदर्यीकरण करने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है. मन का एक बड़ा हिस्सा इस वक्त जलकुंभी से ढका हुआ है, जिसने पानी की बची-खुची ऑक्सीजन को भी सोख लिया है. गंदगी, सीवेज और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज मुजफ्फरपुर की यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है और इसका खामियाजा बेजुबान जलीय जीवों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है.
