मातृभाषा में इंजीनियरिंग शिक्षा की राह खुली वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी 2020) के अनुपालन में, मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बीआरएबीयू में आयोजित वृहद पारिभाषिक शब्द-संग्रह (इंजीनियरिंग) की कार्यशाला सह समीक्षा बैठक संपन्न हुई. यह आयोजन वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग (सीएसटीटी), उच्चतर शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के प्रायोजन में विवि के मैथिली विभाग के संयोजन में 7 अक्टूबर, 2025 से चल रहा था. इस समीक्षा बैठक का मुख्य उद्देश्य इंजीनियरिंग की 18,700 से अधिक तकनीकी शब्दावलियों के अंग्रेजी-हिंदी-मैथिली संस्करण को अंतिम रूप देना था. इससे पहले, इन शब्दावलियों का निर्माण कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय व डॉ एपीजे अब्दुल कलाम विमेंस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दरभंगा में किया जा चुका था. समीक्षा के लिए मैथिली व इंजीनियरिंग विषय के आठ-आठ विशेषज्ञ शामिल हुए, जिन्हें 16 भागों में बंटी हुई लगभग 11-12 सौ शब्दावलियों की प्रिंट कॉपी दी गई थी. विशेषज्ञों ने दो समूहों में विभाजित होकर गहन विचार-विमर्श किया व जरूरी सुधार कार्य किये. गहन मंथन के बाद आज लगभग 18,700 शब्दावली के मैथिली पर्याय को अंतिम रूप दे दिया गया. आयोग ने कार्यप्रणाली पर जताया संतोष यह कार्यशाला बीआरएबीयू के केंद्रीय पुस्तकालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गयी थी. आयोग की ओर से आए परियोजना निदेशक दीपक कुमार और समन्वय अधिकारी इं सुमित भारती ने विशेषज्ञ सलाहकार समिति (समीक्षा) बैठक का संचालन किया. विवि मैथिली विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो इन्दुधर झा ने इस पूरी बैठक का समन्वय किया. विशेषज्ञों की गंभीरता व गहन प्रणाली से किए गए काम पर आयोग के अधिकारियों ने संतोष व्यक्त किया. बैठक में प्रो राजकुमार झा, डॉ आरपी गुप्ता, डॉ दीपक चौधरी, डॉ वंदना, विनायक झा सहित मैथिली और इंजीनियरिंग क्षेत्र के कुल 16 विशेषज्ञों ने भाग लिया और मातृभाषा में ज्ञान के प्रसार के इस अहम कार्य को अंजाम दिया.
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