चुनाव पेज ::: कर्मयोगी बने टिकट के दावेदार, माननीयों की नींद हराम

Karmayogi becomes ticket contender

सुनील कुमार सिंह, मुजफ्फरपुर जिले में किसी दल के राजनेताओं के लिए इस बार चुनावी डगर आसानी से पार नहीं होनेवाली है. एक तो गठबंधन से अलग कई दल राह में कांटा बिछाये हुए हैं. दूसरा हमेशा से नेताजी की जीत के लिए एड़ी-चोटी एक कर देने वाले समर्पित कार्यकर्ता भी टिकट के दावेदार बन गये हैं. इनमें से कई ऐसे हैं जिनकी पहुंच पार्टी के दिग्गजों तक है और उनके नाम को सीधा खारिज कर देना टिकट के निर्णायकों के लिए भी आसान नहीं हो रहा है. यही कारण है कि कोई प्रमुख दल अब तक जिले की एक भी सीट पर पत्ता नहीं खोल पाया है, जबकि दो दिन बाद यानी 10 अक्तूबर से नामांकन शुरू होनेवाला है. दूसरी तरफ यदि नेताजी कर्मयोगियों को एक बार फिर पीछे धकेल टिकट पाने में कामयाब हो भी गये, तो जीत के लिए मतदाताओं के सवालों का जवाब देने के साथ-साथ अपनों को मनाना भी बड़ी चुनौती होगी. गौरतलब है कि इस बार चुनौती खासकर दोनों गठबंधनों के उन विधायक-पूर्व विधायकों को मिल रही है जो या तो मंत्री हैं या रह चुके हैं. जिनके पास कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है. ….और पार्टी में भी गहरी पैठ है. लेकिन, कर्मयोगियों के दावे भी कमजोर नहीं हैं. उनका कहना है कि वे पार्टी के लिए तन-मन से समर्पित हैं और जनता से गहरा जुड़ाव है. तो, फिर पार्टी उन्हें क्यों नहीं मौका देगी. मतदाता वोट तो पार्टी को ही देते हैं. ऐसे में जिले की राजनीति में इस बार कई दिग्गजों का राजनीतिक भविष्य दांव पर है. जिले में सर्वाधिक दावेदार मुजफ्फरपुर नगर, कांटी, कुढ़नी, औराई, साहेबगंज में सामने आये हैं. गायघाट में तो एक गठबंधन के कार्यकर्ता काफी मुखर हो गये थे. टिकट के दावेदार कर्मयोगी अब तक पार्टी के केन्द्रीय नेताओं से तार बिछाए हुए थे. अब टिकट तय करने वाली कमेटी के पास कैंप कर रहे हैं. दूसरी तरफ अपने टिकट को लेकर कुछ माह पूर्व तक आश्वस्त रहे विधायक, पूर्व विधायक, मंत्री, पूर्व मंत्री समेत कई दिग्गज नेताओं को टिकट के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है. साथ में यह डर भी बना हुआ है कि टिकट के दावेदार कर्मयोगी अगर उदासीन रहे तो उनकी चुनावी नैया कैसे पार लगेगी. उधर, मुजफ्फरपुर के मतदाताओं का ध्यान इस ओर टिका है कि पार्टियां नये चेहरों को मौका देती है या फिर वही पुराने दिग्गज उम्मीदवार के रूप में उनके सामने होंगे. दिग्गजों तक पहुंच बनाने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं के ताल ठोंकने से पार्टी के लिए भी टिकट का निर्णय करना मुश्किल हो रहा है.

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Published by: Sunil kumar

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